Fuel Export Duty: केंद्र सरकार ने पेट्रोल पर बढ़ाई विंडफॉल लेवी, डीजल निर्यात शुल्क में भारी कटौती; नई दरें 16 अक्टूबर से लागू
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने ईंधन निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा संशोधन किया है. वित्त मंत्रालय द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क को 50 पैसे से बढ़ाकर 2.50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.
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नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों की कीमतों में जारी हलचल को देखते हुए भारत सरकार ने ईंधन निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल टैक्स (अप्रत्याशित लाभ कर) की दरों में ताजा संशोधन किया है.
वित्त मंत्रालय द्वारा 16 अक्टूबर को जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, पेट्रोल निर्यात शुल्क में पांच गुना बढ़ोतरी की गई है, जबकि डीजल के निर्यात शुल्क में लगभग 47 प्रतिशत की कटौती की गई है. नई दरें शुक्रवार से प्रभावी कर दी गई हैं.
पेट्रोल पर बढ़ी लेवी, डीजल पर राहत: नई दरों का ब्योरा
मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार, रिफाइनरी कंपनियों द्वारा बाहर भेजे जाने वाले ईंधनों पर संशोधित टैक्स संरचना इस प्रकार है:
- पेट्रोल निर्यात शुल्क: पेट्रोल के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को 50 पैसे प्रति लीटर से बढ़ाकर 50 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है.
- डीजल निर्यात शुल्क: डीजल के निर्यात पर लागू टैक्स को 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 50 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे घरेलू रिफाइनर्स को 7.50 रुपये प्रति लीटर की सीधी राहत मिलेगी.
- विमान ईंधन (ATF): हालिया अधिसूचना में एविएशन टर्बाइन फ्यूल पर पूर्व निर्धारित नियमों के अनुसार समायोजन जारी रखा गया है.
पाक्षिक समीक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजार का प्रभाव
भारत सरकार हर 15 दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की औसत कीमतों और रिफाइनरी मार्जिन के आधार पर विंडफॉल टैक्स की दरों की समीक्षा करती है:
- हालिया महीनों में भारी उतार-चढ़ाव: इससे पहले सितंबर के पखवाड़े में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एटीएफ पर निर्यात शुल्क में कमी की थी, जिसके तहत पेट्रोल पर लेवी घटकर 50 पैसे प्रति लीटर रह गई थी.
- सितंबर की शुरुआत में कटौती: 1 सितंबर से प्रभावी संशोधन में डीजल निर्यात शुल्क 3 रुपये से घटाकर 1 रुपये प्रति लीटर किया गया था, जबकि विंडफॉल टैक्स 24 रुपये से घटाकर 19 रुपये प्रति लीटर लाया गया था.
- अगस्त में दिखा था उछाल: अगस्त के महीने में वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के चलते पेट्रोल पर शुल्क बढ़ाकर 50 रुपये और डीजल पर कुल लेवी 25.50 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी.
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स?
भारत सरकार ने पहली बार जुलाई 2022 में पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर अप्रत्याशित लाभ कर (Windfall Tax) लागू किया था:
- सुपर-नॉर्मल प्रॉफिट पर नियंत्रण: जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रूड ऑयल और ईंधन के दाम अचानक आसमान छूने लगते हैं, तो निजी व सार्वजनिक रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार में आपूर्ति करने के बजाय विदेशी बाजारों में भारी मुनाफे पर तेल निर्यात करने लगती हैं.
- घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करना: सरकार इस कर के माध्यम से कंपनियों द्वारा कमाए जाने वाले अप्रत्याशित मुनाफे के एक हिस्से को कर राजस्व में बदलती है और साथ ही घरेलू बाजार में ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करती है.
- वैश्विक संकट के दौरान वापसी: रूस-यूक्रेन संघर्ष के समय शुरू किए गए इस तंत्र को अंतरराष्ट्रीय तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच नियमित नीतिगत हथियार के रूप में उपयोग किया जाता रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Oct 16, 2026 11:08 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

