देश की खबरें | जेल में कट्टरपंथी बनाने का मामला: एनआईए ने कर्नाटक में छह स्थानों पर छापेमारी की

नयी दिल्ली, 13 दिसंबर राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के आतंकवादी द्वारा कैदियों को कट्टरपंथी बनाने के मामले में बुधवार को बेंगलुरु में छह स्थानों पर छापेमारी की। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।

संघीय एजेंसी के प्रवक्ता ने बताया कि अक्टूबर में दर्ज किए गए मामले की जांच के तहत चार आरोपियों और दो अन्य संदिग्धों के घरों पर छापेमारी की गई है। उन्होंने बताया कि इन चार में से एक आरोपी अभी फरार है।

अधिकारी ने बताया कि एनआईए की टीम ने मोहम्मद उमर, मोहम्मद फैसल रब्बानी, तनवीर अहमद और मोहम्मद फारूक के साथ-साथ फरार जुनैद के परिसरों पर की गई छापेमारी में कई डिजिटल उपकरण, आपत्तिजनक दस्तावेज और 7.3 लाख रुपये नकदी जब्त की।

प्रवक्ता ने कहा कि भारतीय दंड संहिता, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज मामले में तीन आरोपी फिलहाल फरार हैं।

पूर्व में, बेंगलुरु शहर पुलिस ने सात पिस्तौल, चार हथगोले, एक मैगजीन, 45 कारतूस और चार वॉकी-टॉकी के जब्त होने के बाद मामला दर्ज किया था। शुरुआत में पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया था और उनसे पूछताछ के बाद एक और शख्स की गिरफ्तारी हुई, जिससे मामले में अब तक कुल छह गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। एनआईए ने 25 अक्टूबर को मामले की जांच अपने हाथ में लेने के बाद सभी आरोपियों की हिरासत ले ली थी।

प्रवक्ता ने कहा कि जांच से पता चला है कि उमर, रब्बानी, अहमद, फारूक और जुनैद बेंगलुरु में परप्पना अग्रहारा केंद्रीय कारागार में बंद रहने के दौरान लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य और आजीवन कारावास की सजा काट रहे टी नसीर के संपर्क में आए थे।

अधिकारी ने कहा, ‘‘यह भी पता चला था कि नजीर ने हिंसक आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए इन व्यक्तियों को कट्टरपंथी बनाया और भर्ती किया।’’

प्रवक्ता ने कहा कि केंद्रीय कारागार से रिहाई के बाद, पांचों लोगों ने अहमद के नेतृत्व में और नजीर के निर्देश पर आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने की साजिश रची थी। ये पांचों आदतन अपराधी हैं।

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