देश की खबरें | जमानत याचिका लंबित रहने पर अग्रिम जमानत याचिका दायर करना अनुचित

प्रयागराज, नौ नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक निर्णय में कहा है कि नियमित जमानत याचिका लंबित रहने के दौरान अग्रिम जमानत याचिका दायर करना, इस अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग है जिसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि उसके मुवक्किल को इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उन्होंने दावा किया कि प्राथमिकी में याचिकाकर्ता का नाम नहीं है और उसका नाम जांच के दौरान बाद में जोड़ा गया।

अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए अपर शासकीय अधिवक्ता ने कहा कि आवेदक बंटी शर्मा उर्फ ब्रह्म प्रकाश शर्मा ने नियमित जमानत याचिका लंबित रहने के दौरान मौजूदा अग्रिम जमानत याचिका दायर की है जो अनुमति योग्य नहीं है।

पिछले सप्ताह, इस अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति कृष्ण पहल ने कहा, “जब नियमित जमानत याचिका लंबित हो, ऐसे में अग्रिम जमानत याचिका दायर करना अदालती प्रक्रिया का दुरुपयोग है। याचिकाकर्ता उच्च न्यायालय सहित विभिन्न मंचों पर कई आवेदन दाखिल करने का आदी है। यह ‘फोरम शॉपिंग’ का एक क्लासिक उदाहरण है और इसे जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती।”

आवेदक ने सीआरपीसी की धारा 438 के तहत अग्रिम जमानत की मांग करते हुए आवेदन किया है।

अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आवेदक एक कंपनी में सुपरवाइजर था और उसने कंपनी के पॉलिसी बांड में पैसा जमा करने वाले कई लोगों का पैसा कथित तौर पर हड़प लिया था।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि वह प्राथमिकी में नामजद नहीं था और उसने जांच में सहयोग किया था।

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