विदेश की खबरें | क्या हेरोइन की तुलना में अवसाद रोधी दवाएं छोड़ना ज्यादा मुश्किल है?
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

लैंकाशर, 16 फरवरी (द कन्वरसेशन) रॉबर्ट एफ. कैनेडी अपनी नियुक्ति की पुष्टि पर सुनवाई के दौरान कुछ ऐसी बातें कहने के बावजूद अमेरिका के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा मंत्री बन गए हैं, जिनकी वजह से कुछ वर्गों की भौंहें तन गईं।

इन बातों में उनका यह दावा भी शामिल है कि कुछ लोगों के लिए अवसाद रोधी दवाओं का सेवन छोड़ना हेरोइन छोड़ने से ज्यादा मुश्किल होता है। वह विशेष रूप से वर्तमान पीढ़ी की अवसाद रोधी दवाओं का उल्लेख कर रहे थे जिन्हें ‘सिलेक्विट सेरोटोनिन रीअपटेक इनहिबिटर’ (एसएसआरआई) कहा जाता है।

आरएफके जूनियर चिकित्सा के बारे में विवादित बयान देने के लिए जाने जाते हैं, ऐसे में सवाल उठता है कि अवसाद रोधी दवाओं और हेरोइन से छुटकारा पाने के बारे में उन्होंने जो कहा है वह सही है?

एसएसआरआई दवाओं को छोड़ना वाकई मुश्किल सकता है। इनके सेवन से कुछ लोग “एसएसआरआई का सेवन रोकने के सिंड्रोम” से पीड़ित हो जाते हैं। इस सिंड्रोम से पीड़ित लोगों में चक्कर आने, जी मिचलाने, सिरदर्द और थकान समेत फ्लू-जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। ज्यादातर मामलों में, लक्षण हल्के होते हैं और कुछ समय में खत्म हो जाते हैं।

अवसाद रोधी दवाओं से छुटकारा पाने का प्रयास कर रहे लोग, जो इस प्रकार के लक्षण अनुभव करते हैं, कभी-कभी यह मान लेते हैं कि उनका अवसाद पुनः लौट आया है, और वे पुनः अवसाद रोधी गोलियों का सेवन शुरू कर देते हैं। लोग अवसाद की वापसी और एसएसआरआई का सेवन रोकने के बीच अंतर नहीं कर पाते। इसके कारण लोग अवसाद रोधी दवा लेना जारी रख सकते हैं, भले ही उन्हें इसकी आवश्यकता न हो।

अवसाद रोधी दवाओं में ‘पैरोक्सेटीन’ और ‘फ्लूवोक्सामाइन’ शामिल हैं, जो लगभग सात प्रतिशत लोगों में दवाएं न छोड़ने के सिंड्रोम का कारण बनती हैं। लंबे समय तक चलने वालीं अवसाद रोधी दवाओं ‘सेर्ट्रालाइन’ और ‘फ्लूओक्सेटीन’ की वजह से केवल दो प्रतिशत लोग सिंड्रोम से पीड़ित होते हैं।

अन्य अध्ययनों से पता चलता है कि जब लोग अचानक एसएसआरआई लेना बंद कर देते हैं, तो सिंड्रोम से पीड़ित होने की 40 प्रतिशत तक आशंका हो सकती है।

इन दवाओं को बंद करने से सेरोटोनिन (शरीर में मस्तिष्क और तंत्रिका कोशिकाओं के बीच संदेश पहुंचाने वाले रसायन) में अचानक और तेजी से गिरावट आती है, जिससे मस्तिष्क और कोशिकाओं के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है और फिर से दवाओं के सेवन की जरूरत महसूस होने लगती है। यह एक बहुत बड़ी अतिशयोक्ति है, लेकिन सेरोटोनिन का उचित स्तर आपको खुश और तनावमुक्त बनाता है, जबकि कम स्तर आपको दुखी व चिंतित बनाता है।

हेरोइन मस्तिष्क, रीढ़ की हड्डी और पाचन तंत्रिका (गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट) में पाए जाने वाले प्रोटीन को सक्रिय करती है जिसे ‘म्यू ओपिओइड रिसेप्टर’ कहा जाता है। सक्रिय होने पर, ये रिसेप्टर्स तंत्रिका तंत्र में दर्द के संकेतों को अवरुद्ध करके दर्द की अनुभूति को कम करते हैं।

अवसाद रोधी दवाओं के उपयोगकर्ताओं की तुलना में, हेरोइन का सेवन करने वाले लोग सेवन बंद करने संबंधी सिंड्रोम का ज्यादा अनुभव करते हैं।

दर्द निवारक दवा ‘ओपिओइड’ का सेवन करने वाले लगभग 85 प्रतिशत लोग इसे छोड़ने पर दर्द वापस लौटने के गंभीर लक्षणों का अनुभव करते हैं।

एसएसआरआई की तरह, ओपिओइड सिंड्रोम की गंभीरता इस बात पर निर्भर करती है कि उनका उपयोग कितने समय तक किया गया है।

हेरोइन की “हाफ लाइफ” बहुत छोटी होती है, जिससे यह पता चलता है कि इससे दोबारा गंभीर लक्षण उत्पन्न होंगे। ‘हाफ लाइफ’ शरीर में किसी दवा के काम करने के समय को कहा जाता है।

हेरोइन सिंड्रोम के लक्षणों में नशीली दवाओं की लत, तनाव, मतली, दस्त, पेट में ऐंठन, बुखार और हृदय गति में वृद्धि शामिल है। ये सभी मस्तिष्क और आंत में ओपिओइड रिसेप्टर्स में परिवर्तन के कारण होते हैं। पाचन तंत्र संबंधी लक्षण कम समय तक चलते हैं, जबकि मनोवैज्ञानिक लक्षण, जैसे कि तनाव और चिड़चिड़ापन, वर्षों तक रह सकते हैं।

हेरोइन से छुटकारा पाने के लिए अकसर ‘मेथाडोन’ या ‘ब्यूप्रेनॉरफिन’ से उपचार की आवश्यकता होती है, ये दो दवाएं हैं म्यू ओपिओइड रिसेप्टर को सक्रिय करती हैं, लेकिन इनकी हाफ लाइफ लंबी होती है।

आम तौर पर, हेरोइन से छुटकारा पाने की कोशिश करने वाला व्यक्ति दवा विक्रेता के पास जाता है और मेथाडोन या ब्यूप्रेनॉर्फिन की दैनिक खुराक लेता है। इसे प्रतिस्थापन चिकित्सा कहा जाता है क्योंकि नयी दवा (मेथाडोन) हेरोइन का विकल्प है।

हेरोइन से छुटकारा अपेक्षाकृत अधिक आम और अधिक गंभीर है। लेकिन अवसाद ग्रस्त लोगों को लिए दवाओं का सेवन छोड़ने में अब भी बहुत कठिन हो सकता है। हालांकि कुछ मामलों में यह हेरोइन छोड़ने की तुलना में आसान भी हो सकता है।

आरएफके जूनियर ने स्वास्थ्य से संबंधित कई विवादास्पद बयान दिए हैं, जिनमें, उदाहरण के लिए टीकाकरण शामिल है। हालांकि अवसाद रोधी दवाओं के संबंध में इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि इन दवाओं से छुटकारा पाना बहुत मुश्किल हो सकता है। लेकिन, अधिकांश लोगों के मामले में ऐसा नहीं कहा जा सकता कि यह हेरोइन से छुटकारा पाने जितना मुश्किल होगा।

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