देश की खबरें | केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 5 वर्षीय विधि पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए क्या सीयूईटी जरूरी?: अदालत

नयी दिल्ली, 13 सितंबर दिल्ली उच्च न्यायालय ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को एक हलफनामा देकर यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में पांच साल के विधि पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सीयूईटी अनिवार्य है या नहीं।

इस मुद्दे पर यूजीसी के दो शीर्ष अधिकारियों की अलग-अलग राय के बाद अदालत ने यह स्पष्टीकरण मांगा है।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा की अध्यक्षता वाली पीठ का आदेश दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के उस फैसले के खिलाफ दायर एक याचिका पर आया, जिसमें छात्रों को सीयूईटी के बजाय केवल सीएलएटी-स्नातक 2023 के आधार पर पाठ्यक्रम में दाखिला दिया गया था।

अदालत ने बुधवार को जारी आदेश में कहा कि एक तरफ, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के संयुक्त सचिव द्वारा जारी एक मार्च के पत्र में "स्पष्ट रूप से कहा गया" है कि सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में सभी स्नातक पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए सीयूईटी अनिवार्य है जबकि याचिका के जवाब में यूजीसी के अवर सचिव द्वारा दायर हलफनामे में कहा गया है कि डीयू सीएलएटी के माध्यम से पांच साल के विधि पाठ्यक्रम में छात्रों को दाखिला दे सकता है।

पीठ ने 12 सितंबर के आदेश में कहा, "यूजीसी के अध्यक्ष एक हलफनामा दायर करें जिसमें स्पष्ट रूप से बताया जाए कि पांच साल के स्नातक विधि पाठ्यक्रम में दाखिला देने के मामले में सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों के लिए सीयूईटी अनिवार्य है या नहीं। तीन दिन में हलफनामा दायर किया जाना चाहिए।”

अदालत ने आगे की सुनवाई 18 सितंबर को सूचीबद्ध करते हुए भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा से मामले में सहायता करने का अनुरोध किया।

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