विदेश की खबरें | तुर्किये में यूरोपीय देशों के साथ परमाणु वार्ता करेगा ईरान
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

शुक्रवार को तुर्किये के इस्तांबुल में यह वार्ता होगी। जून में इजराइल-ईरान के बीच 12 दिनों के युद्ध के बाद यह पहली बैठक होगी। इस युद्ध में अमेरिका ने भी ईरान में परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया था। मई में भी इस्तांबुल में इसी तरह की एक बैठक हुई थी।

इस चर्चा में ईरानी अधिकारियों के साथ ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के अधिकारी शामिल होंगे- जिन्हें ई3 राष्ट्रों के रूप में जाना जाता है- और इसमें यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख काजा कालास भी शामिल होंगे।

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा, "बातचीत का विषय स्पष्ट है, प्रतिबंधों को हटाना और ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दे।" उन्होंने कहा कि यह बैठक उप-मंत्री स्तर की होगी।

ईरान की परमाणु गतिविधियों को रोकने के लिए 2015 में पश्चिमी देशों ने उसके साथ समझौता किया था। वर्ष 2018 में समझौते से अमेरिका बाहर निकल गया और कुछ प्रतिबंधों को फिर से लागू करना शुरू कर दिया।

यूरोपीय देशों ने 2015 के समझौते के प्रावधानों को लागू करने की धमकी दी है, जिसके तहत तेहरान द्वारा नियमों का पालन न करने की स्थिति में उस पर फिर से प्रतिबंध लगाए जा सकेंगे।

जर्मन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मार्टिन गिसे से जब पूछा गया कि जर्मनी वार्ता में किसे भेजेगा और उसकी क्या अपेक्षाएं हैं, तो उन्होंने कहा कि "वार्ता विशेषज्ञ स्तर पर हो रही है।"

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने रविवार को संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुतारेस को लिखे पत्र में कहा कि तीनों यूरोपीय देशों के पास इस तरह के तंत्र को लागू करने के लिए "किसी भी तरह का कानूनी, राजनीतिक और नैतिक आधार" नहीं है। उन्होंने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी पर समझौते में अपनी प्रतिबद्धताओं को बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया।

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