राजदूत माजिद रवांची ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों को बहाल करने से ईरान और अन्य बड़ी शक्तियों के बीच 2015 में हुआ परमाणु समझौता समाप्त हो जाएगा और तेहरान अपनी सभी प्रतिबद्धताओं से मुक्त हो जाएगा।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, “अगर ऐसा होता है तो ईरान पर कोई दबाव नहीं होगा कि उसे आगे क्या कार्रवाई करनी है। ईरान के लिए सभी विकल्प खुले होंगे।”
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तेहरान पर से हथियार प्रतिबंध हटाना परमाणु समझौते को समर्थन देने वाले 2015 के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का हिस्सा है।
रवांची की इस टिप्पणी से एक दिन पहले अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने ईरान पर उस सूरत में संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों को फिर से लगाने की चेतावनी दी थी, अगर सुरक्षा परिषद हथियार प्रतिबंधों को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करती। इन प्रतिबंधों की अवधि अक्टूबर में समाप्त होनी है।
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पोम्पिओ ने कहा, “ईरान उन्नत हथियार प्रणालियां खरीदने में सक्षम हो जाएगा और दुनिया भर मे आतंकवादियों एवं दुष्ट शासनों के लिए पसंदीदा हथियार डीलर बन जाएगा।”
ईरान के लिए अमेरिकी विशेष प्रतिनिधि ब्रायन हुक और अमेरिकी राजदूत केली क्राफ्ट ने इसे अस्वीकार्य बताया और अमेरिकी मसौदा प्रस्ताव से सुरक्षा परिषद के सदस्यों को अवगत कराया जो प्रतिबंधों को अनिश्चितकाल तक जारी रखेगा।
एपी
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