नयी दिल्ली, सात अगस्त घरेलू बिजली पारेषण क्षेत्र में अगले पांच साल में 1.8 लाख करोड़ रुपये का निवेश आने का अनुमान है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने एक रिपोर्ट में यह कहा है।
इक्रा के अनुसार नवीकरणीय ऊर्जा को उत्पादन इकाइयों से ग्रिड तक पहुंचाने की ढांचागत सुविधाओं के विकास से बिजली पारेषण क्षेत्र में निवेश को गति मिलेगी।
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रेटिंग एजेंसी ने शुक्रवार को एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘इक्रा को उम्मीद है कि अखिल भारतीय स्तर पर अगले पांच साल में 2020-21 से 2024-25 में 1,800 अरब रुपये (1.8 लाख करोड़ रुपये) का निवेश बिजली पारेषण क्षेत्र में आएगा। इस निवेश को उत्पादित नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड तक पहुंचाने के लिये जरूरी ढांचागत सुविधा से गति मिलेगी।’’
रिपोर्ट के अनुसार नीतियों के मामले में परंपरागत स्रोत (कोयला और गैस) के बजाए नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों (पवन और सौर) पर ध्यान अधिक होने के साथ, अब जोर उत्पादित अक्षय ऊर्जा के लिये पारेषण ढांचागत सुविधा पर है।
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इक्रा के समूह प्रमुख और वरिष्ठ उपाध्यक्ष (कॉरपोरेट रेटिंग) सब्यसाची मजूमदार ने कहा कि केंद्र ने 25,000 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के पारेषण के लिये शुल्क आधारित प्रतिस्पर्धी बोली मार्ग के तहत 14 पारेषण परियोजनाएं तैयार की हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने राज्यों के भीतर इस खंड में अन्य छह परियोजनाओं तैयार की हैं, जिस पर काम होना है।
मजूमदार ने यह भी कहा क कि कोविड-19 के कारण उत्पन्न बाधाओं से बिजली मांग और क्षेत्र में निवेश धीमा हो सकता है। लेकिन 2021-22 से इसमें तेजी की उम्मीद है।
इक्रा ने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में अगले चार-पांच साल में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी अच्छी-खासी बढ़ेगी। हालांकि, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन और अन्य सरकारी पारेषण कंपनियां बिजली पारेषण खंड में प्रमुख इकाइयां बनी रह सकती हैं।
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