नयी दिल्ली, 31 दिसंबर स्नातक पाठ्यक्रम में दाखिले के लिये विश्वविद्यालयीन सामान्य प्रवेश परीक्षा (सीयूईटी) की शुरुआत, शैक्षणिक कैलेंडर में देरी, उच्च शिक्षा में सुधार तथा चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम की ओर बढ़ना इस साल शिक्षा क्षेत्र की अहम सुर्खियां रहीं।
दो टर्म में परीक्षा लेने की जगह सीबीएसई और सीआईएससीई बोर्ड फिर से साल में एक बार परीक्षा लेने के प्रारूप की ओर लौटे । इसके अलावा एनसीईआरटी ने 12 वीं कक्षा के पाठ्यक्रम से 2002 के गुजरात दंगों, आपातकाल, शीत युद्ध, नक्सल आंदोलन और मुगल दरबार से संबंधित अध्यायों को हटा दिया ।
इसके अतिरिक्त इस साल, सीबीएसई ने 11वीं और 12वीं कक्षा के इतिहास और राजनीति विज्ञान के पाठ्यक्रम से गुटनिरपेक्ष आंदोलन, अफ्रीकी-एशियाई क्षेत्रों में इस्लामी साम्राज्यों के उदय और औद्योगिक क्रांति के अध्यायों को भी हटा दिया।
इसी तरह दसवीं कक्षा के पाठ्यक्रम से ‘खाद्य सुरक्षा’ पर एक अध्याय से ‘कृषि पर वैश्वीकरण का प्रभाव’ विषय को हटा दिया गया था । फैज अहमद फैज की दो नज्मों को भी इस साल ‘धर्म, सांप्रदायिकता और राजनीति-सांप्रदायिकता, धर्मनिरपेक्ष राज्य’ खंड से हटा लिया गया था ।
सरकार ने इस साल केंद्रीय विद्यालयों में प्रवेश के लिए संसद सदस्यों सहित विभिन्न विवेकाधीन कोटा को समाप्त करने का निर्णय लिया। इस निर्णय से केंद्र सरकार द्वारा वित्तपोषित स्कूलों में 40,000 से अधिक सीट को मुक्त कराने में मदद मिली ।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने मार्च में घोषणा की थी कि देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्नातक में दाखिला 12 वीं कक्षा के अंकों के आधार पर नहीं, बल्कि सीयूईटी के माध्यम से होगा।
सीयूईटी-यूजी का पहला संस्करण तकनीकी गड़बड़ियों के कारण परीक्षा रद्द होने और परीक्षार्थियों को इसके कारण हुई परेशानियों के कारण चर्चा में रहा। यूजीसी अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने कहा था कि कुछ केंद्रों पर जानबूझकर गड़बड़़ी किये जाने की सूचना मिलने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी।
कोरोना वायरस महामारी के कारण करीब दो साल तक प्रत्यक्ष कक्षा बंद रहने के बाद इस साल फिर से स्कूल और कॉलेज में प्रत्यक्ष रूप से कक्षा का संचालन शुरू हुआ।
यूजीसी ने इस साल भारतीय और विदेशी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिये संयुक्त या दोहरी डिग्री की पेशकश करने का मार्ग प्रशस्त किया।
विश्वविद्यालयों ने इसी साल चार साल के स्नातक पाठ्यक्रम की ओर कदम बढ़ाए और यूजीसी ने बाद में दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा कि प्रतिष्ठा पाठ्यक्रम चार साल के होंगे । हालांकि, आयोग ने बाद में यह स्पष्ट किया कि जब तक चार वर्षीय पाठ्यक्रम पूरी तरह लागू नहीं होता है, तब तक तीन साल का स्नातक पाठ्यक्रम बंद नहीं किया जायेगा ।
नयी व्यवस्था में स्नातक के बाद छात्र सीधे पीएचडी पाठ्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।
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