देश की खबरें | माकपा राज्य सचिव सलीम के मुर्शिदाबाद लोकसभा क्षेत्र से मैदान में उतरने पर मुकाबला हुआ दिलचस्प

मुर्शिदाबाद (पश्चिम बंगाल), पांच अप्रैल पश्चिम बंगाल की मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट के लिए होने वाले चुनाव में मुकाबला दिलचस्प होता दिख रहा है क्योंकि मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने अपनी राज्य इकाई के सचिव मोहम्मद सलीम को मैदान में उतारा है।

लेकिन मुर्शिदाबाद से मौजूदा सांसद और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार अबू ताहिर खान एक सियासी प्रतिद्वंद्वी के रूप में सलीम को ज्यादा तवज्जो नहीं देते।

खान का कहना है कि चुनाव में उनका मुकाबला मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र से विधायक और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी गौरी शंकर घोष से है।

इस निर्वाचन क्षेत्र को अपेक्षाकृत एक पिछड़े क्षेत्र के तौर पर देखा जाता जहां चुनाव के दौरान अक्सर हिंसा की खबरें लोगों को सुनने को मिलती हैं।

तीनों उम्मीदवार इस बात से सहमत हैं कि मुर्शिदाबाद जिले में हिंसा एक बड़ा मुद्दा है लेकिन उन्हें लगता है कि आगामी लोकसभा चुनाव में इसका कोई खास प्रभाव नहीं पड़ेगा। उम्मीदवारों का मानना है कि हिंसक गतिविधियां पंचायत चुनावों के दौरान ज्यादा होती हैं।

वर्ष 2003 के बाद से जिले में सभी पंचायत चुनावों में हिंसा और मौतें हुईं हैं।

अंग्रेजों ने 1757 में प्लासी की लड़ाई में नवाब सिराज-उद-दौला को हराया था, उससे पहले तक मुर्शिदाबाद बंगाल की राजधानी के तौर पर जाना जाता था। गौरवशाली अतीत होने के बावजूद मुर्शिदाबाद एक अपेक्षाकृत पिछड़ा क्षेत्र बना हुआ है हालांकि यहां के लोग हस्तशिल्प, रेशम और मलमल के काम को बखूबी जानते हैं। मुर्शिदाबाद के रहने वाले लोगों की बड़ी आबादी देश के विभिन्न हिस्सों में प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करती है।

बांग्लादेश के साथ सीमा साझा करने वाले मुर्शिदाबाद निर्वाचन क्षेत्र में सात विधानसभा क्षेत्र आते हैं, जिनमें से छह भागाबंगोला, रानीनगर, मुर्शिदाबाद, हरिहरपारा, डोमकल और जलांगी मुर्शिदाबाद जिले का हिस्सा हैं जबकि करीमपुर नादिया जिले में स्थित है।

मुर्शिदाबाद विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा की सभी छह सीट पर 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने जीत हासिल की थी। मुर्शिदाबाद लोकसभा सीट पर 1980 से 2004 तक माकपा का कब्जा था लेकिन 2004 और 2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस इस सीट को हथियाने में कामयाब रही। लेकिन 2014 और 2019 के चुनाव में इस सीट पर क्रमश माकपा और टीएमसी अपनी-अपनी जीत का पताका फहराने में कामयाब हुईं।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुर्शिदाबाद निर्वाचन क्षेत्र वास्तव में 2000 के दशक की शुरुआत से ही इनमें से किसी भी पार्टी का गढ़ नहीं रहा है जो चुनाव के दौरान हिंसा का एक प्रमुख कारण हो सकता है।

माकपा इस बार किसी जमाने में अपनी कट्टर प्रतिद्वंद्वी रही कांग्रेस के साथ मिलकर पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ रही है।

माकपा की राज्य इकाई के सचिव और पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य सलीम ने कहा कि स्थानीय जनता का प्रवासी मजदूरों के रूप में काम करना, संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) और टीएमसी के कुछ नेताओं के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप जैसे कुछ प्रमुख मुद्दे हैं।

उन्होंने 'पीटीआई-' से कहा, ''दो सत्ता विरोधी शक्तियां संयुक्त रूप से काम कर रही हैं, एक भाजपा के खिलाफ है और दूसरी टीएमसी के खिलाफ।''

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