देश की खबरें | कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने का निर्देश दें: ईजीआई

नयी दिल्ली, आठ अप्रैल एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया (ईजीआई) ने मध्य प्रदेश और ओडिशा में पत्रकारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की घटनाओं को शुक्रवार को ‘‘अत्यंत व्यथित करने वाली’’ करार दिया और लोकतांत्रिक मूल्यों एवं प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को ‘‘कड़े निर्देश’’ जारी करने का आग्रह किया।

गिल्ड ने एक बयान में कहा कि राज्य की शक्तियों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है और मंत्रालय दोनों घटनाओं का "तत्काल" संज्ञान ले।

मध्य प्रदेश के सीधी जिले में एक कलाकार की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे स्थानीय पत्रकार कनिष्क तिवारी और कुछ कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था और दो अप्रैल को हिरासत के दौरान उन्हें कथित तौर पर कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया।

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि हिरासत में लिए गए लोगों की अंत:वस्त्रों में तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दो स्थानीय पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया।

इस संबंध में पुलिस ने दावा किया कि पत्रकार को अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया था क्योंकि वह भी इंद्रावती ड्रामा स्कूल के निदेशक नीरज कुंदर की गिरफ्तारी के खिलाफ कोतवाली पुलिस थाने के सामने "अनधिकृत तरीके से" किए गए विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।

हालांकि, ईजीआई ने कहा कि तिवारी रंगमंच कलाकार की गिरफ्तारी के खिलाफ हुए प्रदर्शन को कवर कर रहे थे, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक विधायक और उनके बेटे के खिलाफ कथित तौर पर कुछ अभद्र टिप्पणी की थी।

इसने कहा, "एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया नागरिक समाज के एक अन्य सदस्य की गिरफ्तारी के विरोध और संबंधित समाचार की कवरेज को लेकर दो अप्रैल, 2022 को सीधी जिले, मध्य प्रदेश की पुलिस द्वारा एक स्थानीय पत्रकार के साथ-साथ नागरिक समाज के कुछ सदस्यों को गिरफ्तार करने, निर्वस्त्र और अपमानित किए जाने के तरीके से स्तब्ध है।’’

ईजीआई ने कहा कि पुलिस ने पत्रकार और कार्यकर्ताओं की तस्वीरें लीं और उन्हें शर्मसार एवं अपमानित करने के लिए तस्वीरों को सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया।

गिल्ड ने कहा, "हालांकि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पुलिसकमिर्यों को निलंबित कर दिया है और इस भयावह मामले की जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन पत्रकारों पर बेरहमी से हमला करने और डराने-धमकाने की पुलिस और स्थानीय प्रशासन की यह बढ़ती प्रवृत्ति बेहद परेशान करने वाली है तथा इसकी जांच की जरूरत है।"

वहीं, ओडिशा में एक ओडिया टेलीविजन पत्रकार को एक थाने के भीतर कथित तौर पर पीटा गया और बाद में बेहोश होने पर अस्पताल के बिस्तर से उसका पैर बांध दिया गया, जिससे बड़े पैमाने पर आक्रोश फैल गया था। इसके बाद पुलिस ने घटना की जांच डीएसपी-रैंक के अधिकारी से कराने का आदेश दिया था।

पत्रकार लोकनाथ दलेई ने दावा किया कि बालासोर जिले के नीलगिरि थाना क्षेत्र में कथित भ्रष्टाचार के बारे में लिखने के कारण उनकी पिटाई की गई।

दलाई को चार अप्रैल को नीलगिरि बाजार में एक होमगार्ड के साथ मारपीट करने के आरोप में बुधवार को गिरफ्तार किया गया था। पत्रकार ने आरोप से इनकार किया है और कहा है कि होमगार्ड के वाहन को उनकी मोटरसाइकिल से अनजाने में टक्कर लग गई थी।

गिल्ड ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से "पत्रकारों और नागरिक समाज के सदस्यों के खिलाफ पुलिस की ज्यादतियों का तत्काल संज्ञान लेने और सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लोकतांत्रिक मूल्यों एवं प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान करने के लिए सख्त निर्देश जारी करने का आग्रह किया।"

संपादकों के निकाय ने इसके साथ ही यह भी कहा कि राज्य की शक्ति का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जरूरत है।

ईजीआई ने कहा, "किसी भी स्वतंत्र रिपोर्टिंग को दबाने के प्रयास में पत्रकारों, स्ट्रिंगर और जिला पत्रकारों के साथ अक्सर अमानवीय व्यवहार किया जाता है, जो गंभीर चिंता का विषय है।"

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