विदेश की खबरें | विशाल परिवर्तन की दिशा में छोटा सा कदम है इंडोनेशिया का कार्बन कर

जकार्ता, 26 नवंबर (360 इन्फो) इंडोनेशिया को कम कार्बन निर्भरता वाली अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए अरबों का खर्च करना होगा। देश द्वारा हाल में पारित कार्बन कर उसका महज एक हिस्सा प्रदान करेगा, और इसलिए इसकी आर्थिक और जलवायु महत्वाकांक्षा के बीच व्यापक अंतर अब भी बना रहेगा।

इसके बावजूद, कार्बन पर कर लगाना इंडोनेशिया के कार्बन कटौती लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और प्रशंसनीय कदम है। यह कर तेजी से विकासशील क्षेत्र में केवल कुछ चुनिंदा लक्ष्यों में से एक है, जहां कॉर्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन बहुत हावी है।

पेरिस समझौते में इंडोनेशिया भी शामिल है लेकिन इसकी दो-तिहाई ऊर्जा वर्तमान में जीवाश्म ईंधनों से मिलती है। इसने अपने ज्यादा विकसित सहयोगी चीन के अनुरूप 2060 तक शून्य उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने की प्रतिबद्धता जताई है लेकिन इसका कार्बन उत्सर्जन कटौती लक्ष्य वैश्विक तापमान वृद्धि को औद्योगिक क्रांति से पहले के तापमान से महज 1.5 डिग्री वृद्धि तक रोकने के पेरिस समझौता लक्ष्य को हासिल करने में अत्यधिक अपर्याप्त है।

कोविड-19 संकट का मतलब है कि 2030 तक उत्सर्जन को 29 प्रतिशत तक कम करने की पहले की प्रतिबद्धता को तब तक अद्यतन नहीं किया गया था जब इंडोनेशिया ने जुलाई में जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र संरचना संधि को प्रस्तुत किया था।

इसके बजाय, सरकार 2045 की अपनी स्वतंत्रता वर्षगांठ तक गरीबी में कमी, मानव संसाधन विकास, आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन प्रदान करने के लिए अपने "एक सौ साल इंडोनेशिया" के दृष्टिकोण के साथ एक न्यायसंगत और किफायती परिवर्तन के लिए एक दीर्घकालिक रणनीति के साथ आई।

इसने आर्थिक और जलवायु दोनों लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए कार्बन मूल्य निर्धारण और कार्बन कर सहित जलवायु वित्तपोषण नियमों को बढ़ावा दिया। कार्बन कर विधेयक कोविड-19 की स्थिति ठीक करने में सहायता के लिए एक व्यापक कर सुधार का हिस्सा था, और इसमें देश के मूल्य वर्धित कर को बढ़ाना और कॉर्पोरेट कर में कटौती को रद्द करना शामिल था।

प्रति किलो 30 इंडोनेशियाई रुपिया कार्बन डाइऑक्साइड समतुल्य (सीओ2ई) का स्वीकृत कार्बन कर मूल्य, 75 रुपिया प्रति किलो की शुरुआती प्रस्तावित न्यूनतम कर से काफी कम है और विश्व बैंक की 35 डॉलर से 100 डॉलर प्रति टन की सिफारिश से बहुत कम है।

जलवायु मुद्दों को आर्थिक नीति और वित्तीय निर्णयों के मूल में लाने के उद्देश्य से कुछ 64 वित्त मंत्रियों ने हेलसिंकी सिद्धांतों पर हस्ताक्षर किए हैं।

दक्षिण कोरिया, जापान और, हाल ही में, चीन सभी ने विदेशी कोयला बिजली परियोजनाओं के वित्तपोषण को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है। इससे अक्षय ऊर्जा और ऊर्जा दक्षता परियोजनाओं को बढ़ावा मिलेगा।

इसी तरह, इंडोनेशिया के कार्बन टैक्स से प्राप्त राजस्व का उपयोग अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए किया जाएगा, और उत्सर्जन में कमी के अन्य प्रयासों में सहायता करेगा। नई कम कीमत को देखते हुए, हालांकि, ऊर्जा क्षेत्र में आवश्यक उत्सर्जन में कमी के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा।

किसे चुकानी होगी कीमत?

इंडोनेशिया का नया कार्बन कर बिजली संयंत्रों, परिवहन, लुगदी और कागज, पेट्रोकेमिकल्स, सीमेंट और निर्माण सामग्री जैसे कार्बन-सघन क्षेत्रों पर लगाया जाएगा।

हालांकि कोयला उद्योग पर सीधे तौर पर कर नहीं लगाया गया है, कर पांच क्षेत्रों पर लागू होगा जो इंडोनेशिया के कार्बन उत्सर्जन में सबसे अधिक योगदान करते हैं: वानिकी, ऊर्जा और परिवहन, अपशिष्ट, कृषि और औद्योगिक प्रसंस्करण।

ऊर्जा के लिए कोयले को अत्यधिक जलाने पर वर्तमान निर्भरता को देखते हुए, कार्बन कर से इंडोनेशिया को कोयले से उत्सर्जन को काफी कम करने में मदद मिलनी चाहिए। यह इस प्रकार है कि बिजली की कीमत, जो ज्यादातर कोयले से प्राप्त होती है, वह बढ़ जाएगी।

उत्पादकों और उपभोक्ताओं को स्थायी उत्पादन और खपत के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, लेकिन यह उपभोक्ता हैं जो अंततः उच्च कीमतों के माध्यम से कर का भुगतान करेंगे।

(306 इन्फो डॉट ओआरजी)

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