देश की खबरें | एहतियातन हिरासत के नाम पर आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बलि नहीं दी जा सकती: न्यायालय

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि एहतियातन हिरासत के नाम पर केवल इसलिए किसी आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बलि नहीं दी जा सकती कि वह आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहा है। न्यायालय ने इसके साथ ही नौकरी दिलाने के नाम पर सैकड़ों लोगों को ठगने के आरोपी की हिरासत के तेलंगाना सरकार के आदेश को निरस्त कर दिया।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केवल कानून और व्यवस्था के उल्लंघन की आशंका "सार्वजनिक व्यवस्था के रखरखाव" को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने के मानक को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की पीठ ने स्वीकार किया कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के खिलाफ आरोपों की प्रकृति गंभीर है, लेकिन हिरासत आदेश तेलंगाना अधिनियम 1986 के तहत बिना उचित विचार के पारित किया गया।

पीठ ने कहा, "हम तदनुसार अपील को स्वीकार करते हैं और उच्च न्यायालय के 25 जनवरी, 2022 के आक्षेपित फैसले को रद्द करते हैं। 19 मई, 2021 को बंदी के खिलाफ पारित किए गए हिरासत आदेश को तदनुसार रद्द कर दिया जाएगा।"

हिरासत के आदेश को उच्च न्यायालय के समक्ष चुनौती दी गई थी जिसने 25 जनवरी, 2022 को याचिका खारिज कर दी थी।

पीठ ने अपने हालिया आदेश में कहा, "बंदी के खिलाफ आरोपों की प्रकृति गंभीर है। हालांकि, केवल इस आधार पर एहतियातन हिरासत के नाम पर किसी आरोपी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता की बलि नहीं दी जा सकती है कि व्यक्ति आपराधिक कार्यवाही का सामना कर रहा है।"

शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि पिछले पांच वर्षों में, इस न्यायालय ने तेलंगाना अधिनियम 1986 के तहत जारी पांच हिरासत आदेशों को रद्द किया है।

राम मनोहर लोहिया बनाम बिहार राज्य के 1966 के मामले का जिक्र करते हुए पीठ ने कहा कि कानून और व्यवस्था में गड़बड़ी तथा सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी के बीच का अंतर संबंधित मामले में एक संविधान पीठ द्वारा स्पष्ट रूप से तय किया गया है और यह माना गया था कि प्रत्येक अव्यवस्था सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी संबंधी मानक को तब तक को पूरा नहीं करती है, जब तक कि यह बड़े पैमाने पर समुदाय को प्रभावित न करे।

अपीलकर्ता मल्लादा के. श्री राम का भाई मेसर्स इक्सोराकॉर्पोरेट सर्विसेज, बंजारा हिल्स, हैदराबाद नामक कंपनी में एक कर्मचारी के रूप में काम करता था।

तेरह अक्टूबर 2020 को कंपनी की ओर से बंजारा हिल्स के थाना प्रभारी के पास एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी के एक अन्य कर्मचारी के. महेंद्र ने बिना अनुमति के फेडरल बैंक में एक वेतन खाता खोला था और बंदी के साथ साजिश रची थी तथा नौकरी की चाहत रखने वाले 450 उम्मीदवारों से 85 लाख रुपये की राशि एकत्र की।

यह आरोप लगाया गया था कि कंपनी में मानव संसाधन विभाग का प्रभारी रहे सह-आरोपी ने बंदी के साथ मिलीभगत करके गलत तरीके से लोगों से धन इकट्ठा करने की योजना बनाई थी और नौकरी पाने की चाहत रखने वालों से कहा था कि उन्हें कंपनी में नौकरी दी जाएगी और बैंक खाता खोलने एवं वर्दी की आपूर्ति के नाम पर धन एकत्र किया।

आरोपी को दर्ज मामलों में जमानत मिलने के बाद 19 मई 2021 को तेलंगाना अधिनियम 1986 की धारा 3 (2) के प्रावधानों के तहत उसे हिरासत में लेने का आदेश पारित किया गया था।

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