देश की खबरें | भारत की जी20 अध्यक्षता ने ‘मिसाल’ कायम की : पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार पंकज सरन

नयी दिल्ली, 18 सितंबर पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) पंकज सरन ने सोमवार को कहा कि भारत की जी20 की अध्यक्षता ने मिसाल कायम की है क्योंकि इसने वैश्विक मतभेदों को सफलतापूर्वक सुलझाया, खासकर यूक्रेन संकट पर जी7 और रूस के बीच तथा अफ्रीकी संघ को समूह का स्थायी सदस्य बनाने में आम सहमति कायम करने में कामयाब रहा।

रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ सरन ने जी20 के नयी दिल्ली घोषणापत्र को एक ‘‘बड़ी उपलब्धि’’ करार दिया। भारत ने यूक्रेन संघर्ष पर एक भी असहमति ‘नोट’ के बिना सर्वसम्मति बनाई, जब समूह इस पर पूरी तरह से विभाजित था।

जी20 के संयुक्त घोषणापत्र को भारत के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक जीत के रूप में देखा गया। इसे नौ सितंबर को जारी किया गया। आशंका जताई जा रही थी कि शिखर सम्मेलन इस विषय (यूक्रेन संघर्ष) पर मतभेदों के मद्देनजर घोषणापत्र जारी नहीं कर पाएगा।

सरन ने ‘पीटीआई-वीडियो’ से कहा, ‘‘जिस तरह से हम दोनों पक्षों को एक साथ लाने में कामयाब रहे, खासकर अमेरिकियों और यूरोपीय लोगों को एक तरफ तथा रूसियों को दूसरी तरफ, वह उल्लेखनीय था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘इस पर आम सहमति थी। इसमें कोई टीका-टिप्पणी नहीं थी, कोई चेतावनी नहीं थी। यह यूक्रेन संघर्ष पर जी20 के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करने वाला एक स्पष्ट बयान था।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह एक बड़ी उपलब्धि है और अमेरिकी, यूरोपीय, रूसी और ग्लोबल साउथ समेत हर कोई संतुष्ट था।’’

‘ग्लोबल साउथ’ शब्द का इस्तेमाल अक्सर विकासशील और अल्प विकसित देशों के लिए किया जाता है, जो मुख्य रूप से अफ्रीका, एशिया और लैटिन अमेरिका में स्थित हैं।

रूस में भारत के राजदूत रह चुके सरन ने कहा कि भारत ने ऐसे समय में जी20 अध्यक्ष के रूप में कार्यभार संभाला, जब दुनिया कठिन दौर से गुजर रही थी और उसने चुनौतियों से निपटने में अच्छा प्रदर्शन किया।

उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से हमने पश्चिम, जी7 और रूस के बीच, उत्तर और दक्षिण के बीच- मतभेदों को पार किया- यह सब भारतीय कूटनीति और राजनीतिक नेतृत्व का एक बड़ा उदाहरण है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि जी20 की भारत की अध्यक्षता ने एक मिसाल पेश की है क्योंकि वहां बहुत कठिन वैश्विक स्थिति थी, जिसका हमें सामना करना पड़ा।’’

सरन ने समूह के स्थायी सदस्य के रूप में अफ्रीकी संघ को शामिल करने के संबंध में समर्थन जुटाने के लिए भारत की जी20 अध्यक्षता की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘अफ्रीकी संघ 54 देशों का प्रतिनिधित्व करता है। अफ्रीकी महाद्वीप ऐतिहासिक रूप से पूरी दुनिया के लिए भारत की रणनीतिक दृष्टि का हिस्सा रहा है।’’

सरन ने कहा, ‘‘तथ्य यह है कि भारत ने अफ्रीकी संघ की आवाज को जी20 में लाने की पहल की। यह एक बड़ी उपलब्धि है और अफ्रीकी संघ हमेशा याद रखेगा कि यह जी20 का नयी दिल्ली शिखर सम्मेलन था, जिसने उसे जी20 में लाने में सक्षम बनाया, जैसे यूरोपीय संघ समूह में शामिल है।’’

जी20 अध्यक्ष के रूप में भारत ‘ग्लोबल साउथ’ या विकासशील देशों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से समावेशी विकास, डिजिटल नवाचार, जलवायु अनुकूलन और समान वैश्विक स्वास्थ्य तक पहुंच जैसे मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। जनवरी में, भारत ने विकासशील देशों के समक्ष पेश आने वाली समस्याओं और चुनौतियों को रेखांकित करने के उद्देश्य से ‘वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ’ शिखर सम्मेलन की मेजबानी की।

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