जरुरी जानकारी | भारत का सीआरडीएमओ क्षेत्र 2035 तक 25 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच सकता है:रिपोर्ट

नयी दिल्ली, 26 फरवरी भारत का अनुबंध अनुसंधान विकास एवं विनिर्माण संगठन (सीआरडीएमओ) क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर है और इसके 2035 तक 22-25 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ने की संभावना है।

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (बीसीजी) और इनोवेटिव फार्मास्युटिकल सर्विसेज ऑर्गनाइजेशन (आईपीएसओ) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास वर्तमान में 140-145 अरब अमेरिकी डॉलर के वैश्विक सीआरडीएमओ बाजार में दो से तीन प्रतिशत की हिस्सेदारी है, हालांकि इसमें वैश्विक स्तर पर नेतृत्व करने की पूरी क्षमता है।

रिपोर्ट में कहा गया, इस क्षेत्र की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले चार प्रमुख कारकों में आपूर्ति श्रृंखलाओं को जोखिम मुक्त बनाना शामिल है, जिससे भारत एक पसंदीदा ‘आउटसोर्सिंग’ गंतव्य बना। इसके अलावा, मूल्य निर्धारण दबाव और मुद्रास्फीति न्यूनीकरण अधिनियम (आईआरए) जैसी नीतियों से सीमा पार कारोबार में तेजी आ रही है और एडीसी, जीन थेरेपी और आरएनए चिकित्सा जैसे उन्नत तरीकों की बढ़ती मांग से विशेष सीआरडीएमओ सेवाओं को बढ़ावा मिल रहा है।

इसमें कहा गया, अनुसंधान एवं विकास तथा बुनियादी ढांचे में बढ़ते निवेश से देश का नवाचार परिवेश भी मजबूत हो रहा है।

बीसीजी के प्रबंध निदेशक एवं साझेदार विकास अग्रवाल ने कहा कि सीआरडीएमओ उद्योग कई मजबूत अनुकूल परिस्थितियों के साथ मजबूत विकास के चरण की शुरुआत में है।

उन्होंने कहा, ‘‘ हमारी रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि किस प्रकार भारत की अंतर्निहित ताकत, छोटे अणु विशेषज्ञता, लागत प्रतिस्पर्धात्मकता और तेजी से बढ़ता नवाचार परिवेश वैश्विक सीआरडीएमओ बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बनने के लिए आधार प्रदान करता है।’’

अग्रवाल ने कहा कि हालांकि, इस पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए उद्योग और नीति निर्माताओं दोनों की ओर से सामूहिक प्रयास की आवश्यकता होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘ बुनियादी ढांचे, प्रतिभा और नीति सरलीकरण में सही निवेश के साथ, हम वास्तव में वैश्विक औषधि उद्योग के लिए नवाचार व विनिर्माण केंद्र के रूप में उभर सकते हैं।’’

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