नयी दिल्ली, सात मार्च कांग्रेस ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन (नोआ) के बजट में भारी कटौती की घोषणा की है, ऐसे में इस संस्था को लेकर खड़ी हुई अनिश्चितता को देखते हुए अब भारत को पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अपने अनुसंधान की क्षमता को बढ़ाना होगा।
नोआ अमेरिका की संस्था है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘प्रतीत होता है कि इस समय मोदी सरकार की प्राथमिकता राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ संबंधी खतरों से निपटने के लिए एक व्यापार समझौता करना है। लेकिन अन्य क्षेत्रों में भी उनके निर्णयों का भारत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ‘नोआ’ मानसून को समझने में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने इस संस्था के बजट में भारी कटौती और इसके आकार को कम करने की योजना बनाई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘नोआ वैश्विक तापमान, लवणता और समुद्र के जल स्तर जैसे महत्वपूर्ण डेटा एकत्र करता है, जो मानसून के पैटर्न को समझने एवं सही पूर्वानुमान के लिए आवश्यक है। 2009 से मानसून पूर्वानुमान में उपयोग किया जाने वाला समुद्री डेटा मुख्य रूप से नोआ से आया है।’’
रमेश के मुताबिक, हिन्द महासागर में नोआ लगभग 40 प्रतिशत ‘सबसर्फेस ऑब्जर्वेशन’ (पृथ्वी के अंदरूनी भाग के अवलोकन) में योगदान देता है, जबकि भारत का योगदान केवल 11 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा, ‘‘असल में नोआ सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन की निगरानी और प्रबंधन के लिए भी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक संसाधन है। लेकिन इसका भविष्य अनिश्चित दिख रहा है।’’
कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इसका मतलब यह भी है कि भारत को पृथ्वी विज्ञान के क्षेत्र में अपने अनुसंधान की क्षमताओं को काफी हद तक बढ़ाना होगा।’’
हक
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY