देश की खबरें | भारत-रूस संबंधों का इस्तेमाल यूक्रेन में शांति की दिशा में किया जा सकता है: फ्रांसीसी राजनयिक सूत्र

नयी दिल्ली, 21 फरवरी यूक्रेन-रूस मुद्दे पर भारत की भूमिका महत्वपूर्ण बताते हुए फ्रांस के राजनयिक सूत्रों ने मंगलवार को कहा कि भारत और रूस के बीच संबंधों का इस्तेमाल शांति की दिशा में काम करने के माध्यम के रूप में किया जा सकता है।

सूत्रों ने यह भी कहा कि वे यूक्रेन पर संयुक्त राष्ट्र के मसौदा प्रस्ताव पर मतदान से पहले नयी दिल्ली में राजनीतिक नेताओं के साथ संपर्क में हैं लेकिन उन्हें इस बात की बहुत उम्मीद नहीं है कि भारत मतदान करेगा।

यूक्रेन पर मॉस्को के हमले की शुरुआत के एक साल बाद दीर्घकालिक शांति की आवश्यकता पर जोर देने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के मसौदा प्रस्ताव पर इस सप्ताह मतदान किया जाएगा।

सूत्र ने कहा कि यूक्रेन के मुद्दे पर फ्रांस, यूरोपीय संघ और भारत का रुख एक समान नहीं है,लेकिन ‘‘आपने यह भी देखा होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक बयानों में कुछ बदलाव देखा गया है कि यह युद्ध का समय नहीं है।’’

कूटनीतिक सूत्र ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री का यह बहुत महत्वपूर्ण बयान है। हम एकमत हैं कि हम सभी संघर्ष बढ़ने के जोखिम को कम करना चाहते हैं और हम सभी शांति की दिशा में रास्ता तलाशने की कोशिश करना चाहते हैं और इस बारे में भारत का रुख भी बहुत साफ है।’’

सूत्र ने कहा, ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि भारत और रूस की सरकारों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी है और हम भारत सरकार से कहना चाहते हैं कि वे रूसी समकक्षों के साथ अपने संबंधों का इस्तेमाल शांति की ओर हमारे प्रयासों में मदद के लिए करें। यह लंबा रास्ता है। यह लंबी प्रक्रिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन हां, हमारी भारत के साथ इस तरह की बातचीत अक्सर होती है।’’

सूत्रों ने कहा कि फ्रांस और भारत की बहुत कारगर साझेदारी है और उनका गंभीर राजनीतिक संवाद का इतिहास है जो उन्हें जटिल विषयों समेत सभी मुद्दों पर बातचीत की अनुमति देता है।

क्या यूक्रेन-रूस संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र महासभा में मतदान से भारत दूरी बनाएगा? इस प्रश्न के जवाब में सूत्रों ने कहा कि भारत के किसी एक पक्ष में रहने की बहुत संभावना नहीं है लेकिन वे इस पर काम कर रहे हैं।

फ्रांस के एक कूटनीतिक सूत्र ने कहा, ‘‘यह हमेशा संतुलन का सवाल है। हमारा भारत के राजनीतिक नेताओं के साथ संपर्क है। इस स्तर पर हमें अब भी नहीं पता कि सरकार का क्या रुख रहेगा।’’

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