नयी दिल्ली, 20 नवंबर भारत को बहुराष्ट्रीय कंपनियों की ओर से कर नियमों के दुरूपयोग और व्यक्तिगत स्तर पर लोगों के कर चोरी करने से हर साल 10.3 अरब डॉलर (लगभग 75,000 करोड़ रुपये) के कर का नुकसान हो रहा है।
स्टेट ऑफ टैक्स जस्टिस की शुक्रवार को जारी एक रपट के मुताबिक वैश्विक स्तर पर देश हर साल कुल 427 अरब डॉलर से अधिक के कर का नुकसान उठा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट कर और व्यक्तिगत कर में चोरी करना है।
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रपट में कहा गया है कि इतनी राशि से दुनियाभर में हर साल करीब 3.4 करोड़ नर्स का वार्षिक वेतन दिया जा सकता है।
भारत के संदर्भ में रपट में कहा गया है कि इस कर चोरी से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 0.41 प्रतिशत यानी 10.3 अरब डॉलर की कर का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसकी वजह वैश्विक स्तर पर हर साल की जाने वाली कर चोरी है।
रपट के मुताबिक इसमें 10 अरब डॉलर का कर नुकसान बहुराष्ट्रीय कंपनियों से जबकि 20 करोड़ डॉलर का नुकसान व्यक्तियों के कर चोरी से हो रहा है।
इसके सामाजिक प्रभाव की बात की जाए तो यह सरकार के कुल स्वास्थ्य बजट के 44.70 प्रतिशत के बराबर और शिक्षा बजट के 10.68 प्रतिशत के बराबर की राशि है।
इससे 42.30 लाख नर्सों को सालभर का वेतन दिया जा सकता है।
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