जरुरी जानकारी | हरित ऊर्जा उपयोग बढ़ाने, नीतिगत हस्तक्षेप से उद्योग को कार्बन कर से निपटने में मिलेगी मदद: गोयल

नयी दिल्ली, 13 सितंबर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि हरित ऊर्जा का उपयोग बढ़ाने और सरकार के नीतिगत हस्तक्षेप से देश के उद्योग जगत पर यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा इस्पात और एल्युमिनियम जैसे क्षेत्रों पर कार्बन कर लगाने के फैसले से होने वाले प्रभाव को कम करने में मदद मिलेगी।

उन्होंने कहा कि भारत यह जानने के लिए ईयू और अन्य देशों से बातचीत कर रहा है कि सीएबीएम (कार्बन सीमा समायोजन प्रणाली) जैसे नए कदमों से भारतीय उद्योग और विनिर्माता कैसे प्रभावित होंगे।

मंत्री ने हालांकि उद्योग को आश्वस्त किया कि सरकार उसके हितों की रक्षा करेगी।

उन्होंने यहां वाहन कलपुर्जा विनिर्माताओं के संगठन एक्मा के एक कार्यक्रम में कहा, “कोई भी देश कितना भी कानून लाए, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि इससे आपके किसी भी व्यवसाय को नुकसान न पहुंचे। आप निश्चिंत हो सकते हैं...मैं व्यक्तिगत रूप से इन सभी को एक बाधा के रूप में नहीं देखता हूं, लेकिन मैं यह पता लगाने के लिए लगातार जांच कर रहा हूं कि हम इस तथाकथित समस्या सीबीएएम को भारतीय उद्योग के लिए एक लाभ में कैसे बदल सकते हैं।”

यूरोपीय संघ इस साल एक अक्टूबर से सीबीएएम पेश कर रहा है। इसके तहत एक जनवरी, 2026 से यूरोपीय संघ में चुनिंदा आयात पर 20-35 प्रतिशत कर लगेगा।

सीबीएएम या कार्बन टैक्स (एक तरह का आयात शुल्क) एक जनवरी, 2026 से लागू होगा, लेकिन इस साल एक अक्टूबर से अधिक कार्बन उत्सर्जन करने वाले स्टील, सीमेंट, उर्वरक, एल्यूमीनियम और हाइड्रोकार्बन उत्पादों जैसे सात क्षेत्रों की घरेलू कंपनियों को कार्बन उत्सर्जन के संबंध में यूरोपीय संघ के साथ आंकड़े साझा करने होंगे।

पिछले साल भारत ने 8.2 अरब डॉलर मूल्य के लौह, इस्पात और एल्यूमीनियम उत्पादों का निर्यात यूरोपीय संघ को किया। यह इस खंड में कुल निर्यात का 27 प्रतिशत है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि ईयू के साथ बातचीत अच्छी चल रही है।

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