नयी दिल्ली, छह अगस्त बैंकों ने पिछले पांच वित्तवर्षों में 9.90 लाख करोड़ रुपये के ऋण बट्टेखाते में (राइट-आफ) डाले हैं। मंगलवार को संसद को यह जानकारी दी गयी।
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि वित्तवर्ष 2023-24 के दौरान, बैंकों द्वारा 1.70 लाख करोड़ रुपये का ऋण बट्टेखाते में डाला गया, जबकि उसके पिछले वित्तवर्ष में यह राशि 2.08 लाख करोड़ रुपये थी।
वित्तवर्ष 2019-20 के दौरान ‘राइट-ऑफ’ सबसे अधिक 2.34 लाख करोड़ रुपये था, जो अगले वर्ष घटकर 2.02 लाख करोड़ रुपये और वित्तवर्ष 2021-22 में 1.74 लाख करोड़ रुपये रह गया।
उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों और बैंकों के बोर्ड द्वारा स्वीकृत नीति के अनुसार गैर निष्पादित संपत्ति (एनपीए) को संबंधित बैंक की ‘बैलेंस-शीट’ से ‘राइट-ऑफ’ के माध्यम से हटा दिया जाता है।
कांग्रेस सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, ‘‘बैंक अपने बैलेंस-शीट को साफ करने, कर लाभ प्राप्त करने और पूंजी को अनुकूलित करने के लिए अपने नियमित अभ्यास के हिस्से के रूप में राइट-ऑफ के प्रभाव का मूल्यांकन/विचार करते हैं।’’
उन्होंने कहा कि रकम के बट्टेखाते में डालने से उधारकर्ताओं को देनदारियों की छूट नहीं मिलती है और इसलिए बट्टेखाते में डालने से उधारकर्ताओं को कोई लाभ नहीं होता है।
राजेश राजेश अविनाश
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