न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू कुओमो ने बृहस्पतिवार को इस संबंध में एक कानून पर हस्ताक्षर किए थे, जिसके बाद यह कदम उठाया गया। यह नया कानून 180 दिन में अमल में आएगा।
‘नॉनबाइनरी न्यू यॉर्कर्स’ ने मार्च में यह तर्क देते हुए एक मुकदमा दायर किया था कि राज्य नॉन-बाइनरी, इंटरसेक्स को इंगित करने के लिए ‘‘एक्स’’ विकल्प प्रदान करने में विफल रहा है जो कि एक तरह का भेदभाव है।
‘नॉन बाइनरी’ शब्द का इस्तेमाल उन लोगों के लिए किया जाता है, जो न तो पुरुष और न ही महिला लिंग से नाता रखते हैं, जो लिंग बाइनरी के बाहर हैं।
नए कानून के तहत न्यूयॉर्क वासियों को अब नाम बदलने की जानकारी, पता, जन्म स्थान और जन्म तिथि किसी समाचार पत्र में प्रकाशित नहीं करनी होगी। पुराने कानून के तहत नाम परिवर्तन के 60 दिनों के भीतर इसे समाचार पत्र में प्रक्राशित कराना होता था। वे हिंसा या भेदभाव के भय के कारण लिंग उजागर ना करने की मांग भी कर सकते हैं। लिंग संबंधी पहचान में बदलाव की जानकारी व्यक्तिगत रूप से संघीय आव्रजन अधिकारी को देने की आवश्यकता भी नहीं होगी।
न्यूयॉर्क के दो-तिहाई ट्रांसजेंडर का कहना है कि ‘नेशनल सेंटर फॉर ट्रांसजेंडर इक्वेलिटी’ द्वारा 2015 में किए गए लगभग 1,800 न्यूयॉर्क निवासियों के सर्वेक्षण में उनके द्वारा बताए गए लिंग और नाम किसी की भी आईडी (पहचान पत्र) में नहीं हैं।
‘न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज यूनियन’ की कार्यकारी निदेशक डोना लिबरमैन ने एक बयान में कहा कि ‘जेंडर रिकग्निशन एक्ट’ इस समुदाय के लोगों की काफी हद तक मदद करेगा और उनके खिलाफ चले आ रहे भेदभाव को समाप्त करने में भी इससे मदद मिलेगी।
एपी निहारिका शाहिद
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