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जरुरी जानकारी | आयातित खाद्य तेलों की आपूर्ति प्रभावित से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. महंगा होने की वजह से पाम पामोलीन का सामान्य से कम आयात होने की वजह से देश में खाद्य तेलों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम मजबूत बंद हुए। महंगा होने की वजह से लिवाली कमजोर रहने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन तथा डी-आयल्ड केक (डीओसी) कमजोर मांग रहने के बीच सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

जरुरी जानकारी | आयातित खाद्य तेलों की आपूर्ति प्रभावित से तेल-तिलहन कीमतों में सुधार

नयी दिल्ली, छह मार्च महंगा होने की वजह से पाम पामोलीन का सामान्य से कम आयात होने की वजह से देश में खाद्य तेलों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण दिल्ली के तेल-तिलहन बाजार में बुधवार को पिछले कारोबारी सत्र के मुकाबले सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम मजबूत बंद हुए। महंगा होने की वजह से लिवाली कमजोर रहने के कारण मूंगफली तेल-तिलहन तथा डी-आयल्ड केक (डीओसी) कमजोर मांग रहने के बीच सोयाबीन तिलहन के भाव पूर्वस्तर पर बने रहे।

मलेशिया एक्सचेंज दो प्रतिशत से अधिक मजबूत चल रहा है जबकि शिकॉगो एक्सचेंज में फिलहाल एक प्रतिशत से अधिक की मजबूती है।

बाजार सूत्रों ने कहा कि देश में हर महीने औसतन आठ-नौ लाख टन सीपीओ और पामोलीन का आयात होता है। महंगा होने के कारण पाम पामोलीन का आयात घटकर लगभग पांच लाख टन रह गया है। अब समस्या यह है कि इस कमी को कहां से पूरा किया जायेगा? दूसरी ओर सॉफ्ट आयल विशेषकर देश में सबसे अधिक खपत वाले सोयाबीन डीगम तेल का आयात भी कम हो रहा है। होली जैसे त्योहार, शादी-विवाह के सीजन की मांग आदि के कारण मार्च, अप्रैल और मई के दौरान खाद्य तेलों की अधिक मांग रहती है। कम आपूर्ति की इस स्थिति की ओर ध्यान देने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि देश में कपास की भी आवक कम है। पिछले महीने कपास की आवक लगभग सवा दो लाख गांठ की हुआ करती थी जो आज घटकर लगभग 75-78 हजार गांठ रह गई है। कपास की लगभग 225 लाख गांठ की मंडियों में आवक हो चुकी है और लगभग 70 लाख गांठ ही बचा है। कपास की अगली फसल अक्टूबर के लगभग आयेगी जिसमें छह-सात महीने बाकी है।

सूत्रों ने कहा देश में छोटे व्यापारियों, तेल मिलों और दुकानदारों के पास ऐसी वित्तीय स्थिति नहीं है कि वे खाद्य तेलों का बड़ा स्टॉक जमा कर रख सकें। जो व्यापारी 100-150 टन खाद्य तेल का स्टॉक बना लेते थे वे मौजूदा समय में 10 टन का भी स्टॉक नहीं रख पा रहे हैं। ऐसे में मांग निकलने पर खाद्य तेल आपूर्ति की दिक्कत का संकट हो सकता है।

तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,340-5380 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,025-6,300 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 14,750 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,210-2,485 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,150 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,720-1,820 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,720 -1,825 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,500 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,150 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,880 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 8,900 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 4,550-4,570 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 4,350-4,390 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,050 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Mar 06, 2024 09:28 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).