ऋषिकेश, 24 अगस्त उत्तराखंड के सात वन प्रभागों में 1000 एकड़ से अधिक वन भूमि पर वन गुज्जरों द्वारा बटाई (अधिया) पर की जा रही खेती को जल्द ही बंद कराया जाएगा।
इस संबंध में उत्तराखंड वन विभाग के मुखिया (हॉफ) अनूप मलिक ने संबंधित वन अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि वे वन भूमि पर अवैधानिक रूप से की जा रही कृषि बंद करायें या कार्रवाई के लिए तैयार रहें। इससे पहले, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तथा वन मंत्री सुबोध उनियाल भी इस मुद्दे को लेकर वन अधिकारियों से अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं।
वन भूमि से अवैध कब्जा हटाने के अभियान के नोडल अधिकारी व मुख्य वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते ने बताया कि गढ़वाल मंडल के तीन और कुमाऊँ मंडल के चार वन प्रभागों में 1000 एकड़ से अधिक वन भूमि पर वन गुज्जरों द्वारा बटाई/अधिया पर खेती की जा रही है।
जंगलों में रहने वाली इस खानाबदोश जाति के लोगों को अपने मवेशियों के लिए चारा उगाने के लिए वन भूमि दी गयी थी लेकिन उसपर स्वयं कृषि करने के स्थान पर आगे किसी अन्य व्यक्ति को ‘सबलेट’ (दूसरे व्यक्ति को काम करने के लिए देना) कर रहे हैं जो विधिक रूप अपराध की श्रेणी में आता है।
धकाते ने बताया कि देहरादून, हरिद्वार, कालसी, लैंसडॉन, तराई पूर्व, तराई पश्चिम, तराई केंद्रीय प्रभागों के वन प्रभागीय अधिकारियों तथा नियंत्रक अधिकारियों से कहा गया है कि इन क्षेत्रों में अवैध रूप से हो रही कृषि को जल्द बंद करवा कर उन्हें फिर से वन क्षेत्रों के रूप में विकसित किया जाये।
अधिकारियों को चेतावनी दी गयी है कि ऐसा नहीं होने पर सरकार दंडात्मक कार्रवाई कर सकती है।
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