नयी दिल्ली, सात अगस्त दिल्ली उच्च न्यायालय ने गरीब बच्चों को दिये जाने वाले खाद्य सुरक्षा भत्तों के संबंध में ‘भ्रामक’ हलफनामा दाखिल करने पर आप सरकार से नाराजगी जताते हुए शुक्रवार को कहा कि वह खासतौर पर जबकि मध्याह्न भोजन की बात है तो किसी को ‘अपनी आंखों में धूल नहीं झोंकने देगा’।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दावा किया था कि वह मध्याह्न भोजन योजना के तहत हर महीने प्रत्येक बच्चे को 540 रुपये का भुगतान करती है, लेकिन इस साल मार्च में उसके खुद के हलफनामे में कहा गया कि उसने अपने साथ पंजीकृत 8.21 लाख बच्चों को करीब सात करोड़ रुपये का भुगतान किया जो प्रति बच्चा 100 रुपये से भी कम है।
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पीठ को बताया गया कि दिल्ली सरकार ने अप्रैल से जून के बीच कुल 8.25 लाख बच्चों में से करीब पांच लाख बच्चों को कुल करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया। करीब दो लाख मामलों पर प्रक्रिया चल रही है और 75,000 अन्य मामलों में बैंक विवरण बेमेल हैं।
पीठ ने हलफनामे को देखने के बाद कहा कि अगर योजना के तहत केवल पांच लाख बच्चों को भुगतान किया गया है तो प्रत्येक बच्चे को 540 रुपये देने के लिए अप्रैल से जून तक हर महीने करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए।
पीठ ने कहा, ‘‘हलफनामा उलझाने वाला लगता है। यह जानबूझकर गुमराह करने वाला बनाया गया है। यह हलफनामा हमारी आंखों में धूल झोंकने की कोशिश कर रहा है। जहां तक गरीब बच्चों के मध्याह्न भोजन की बात है तो हम निश्चित रूप से किसी को भी हमारी आंखों में धूल नहीं झोंकने देंगे।’’
दिल्ली सरकार के वकील जवाहर राजा ने विसंगतियों को समझाने का प्रयास करते हुए कहा कि मार्च महीने के बाद कक्षा आठवीं के अधिकतर बच्चों ने स्कूल छोड़ दिये होंगे और अनेक मामलों में बैंकों का ब्योरा उपलब्ध आंकड़ों से नहीं मिला।
उन्होंने पीठ से विसंगतियों का कारण पता लगाने के लिए और समय मांगा।
पीठ ने दिल्ली सरकार को विसंगतियों के बारे में समझाने के लिए समय तो दिया, लेकिन राजा की दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
पीठ ने कहा, ‘‘आपको अपना खुद का हलफनामा पढ़ना चाहिए। आप बिना तैयारी के दलीलें रख रहे हैं। आप क्या दलील दे रहे हैं, सोच लीजिए।’’
पीठ एनजीओ महिला एकता मंच की एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसने दिल्ली सरकार को कोविड-19 के लॉकडाउन में स्कूलों के बंद रहने के दौरान पात्र बच्चों को पका हुआ मध्याह्न भोजन या खाद्य सुरक्षा भत्ता देने का निर्देश देने का अनुरोध किया।
इससे पहले केंद्र सरकार ने अदालत को बताया था कि उसने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए मध्याह्न भोजन योजना के तहत केंद्रीय सहायता के तौर पर दिल्ली सरकार को 27 करोड़ रुपये से अधिक जारी किये थे।
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