स्पेन और पुर्तगाल में हुआ ब्लैकआउट अक्षय ऊर्जा के लिए कैसा संकेत
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

स्पेन और पुर्तगाल में हाल में हुई बिजली कटौती ने सौर और पवन ऊर्जा की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. साथ ही इसने परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल की बहस को भी फिर से हवा दी है.28 अप्रैल की दोपहर 12:33 बजे, स्पेन के एक बड़े हिस्से और पुर्तगाल के कुछ क्षेत्रों में अंधेरा छा गया. ट्रेने रुक गईं, फोन और इंटरनेट सेवा बाधित हो गई और एटीएम ने काम करना बंद कर दिया. आइबेरियन प्रायद्वीप में हुआ यह ब्लैकआउट यूरोप के इतिहास में हुई सबसे गंभीर घटनाओं में से एक है.

हालांकि, अधिकांश क्षेत्रों में अगली सुबह तक बिजली बहाल कर दी गई लेकिन हफ्तों बाद भी इस ब्लैकआउट की जांच जारी है.

पिछले हफ्ते स्पेन की ऊर्जा मंत्री, सारा आगेसन ने कहा कि अब तक हमें सिर्फ इतना पता चल पाया है कि ग्रानाडा के एक सब स्टेशन में अचानक बिजली चली गई. जिसके बाद बाडाजोज और सेविले में भी इसी तरह की घटनाएं सामने आईं. इसके कारण 2.2 गीगावॉट बिजली की आपूर्ति बाधित हुई. ऐसा क्यों हुआ, इसका सटीक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है.

इस बीच कुछ लोगों ने अक्षय ऊर्जा पर स्पेन की अत्यधिक निर्भरता को जिम्मेदार ठहराया है. अब 2035 तक परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल को समाप्त करने की योजना पर भी फिर से बहस तेज हो गई है.

क्या अक्षय ऊर्जा इसके लिए जिम्मेदार है?

स्वच्छ ऊर्जा की तरफ तेजी से बढ़ रहे यूरोपीय देशों में स्पेन काफी आगे है. इसका लक्ष्य है कि 2030 तक 81 फीसदी बिजली आपूर्ति अक्षय ऊर्जा स्रोतों से हो. पिछले साल, अक्षय ऊर्जा ने देश की कुल बिजली में रिकॉर्ड 56 फीसदी हिस्सेदारी निभाई. यूरोप की तुलना में स्पेन में सौर ऊर्जा भी लगभग दोगुनी तेजी से बढ़ी है.

ब्लैकआउट से पहले, स्पेन की लगभग 70 फीसदी बिजली का उत्पादन अक्षय स्रोतों, खासकर सौर ऊर्जा से हो रहा था.

विपक्षी पार्टी के कुछ सदस्य और परमाणु ऊर्जा के समर्थक इसको ऐसे प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं कि अक्षय ऊर्जा पर अत्यधिक निर्भरता ही इस संकट का कारण बनी है. हालांकि, देश के ग्रिड ऑपरेटर, रेड एलेक्ट्रिका दे इस्पेना और प्रधानमंत्री, पेद्रो सांचेज, दोनों ने इस दावे को खारिज किया है. वर्तमान में परमाणु ऊर्जा, स्पेन में लगभग 20 फीसदी बिजली की आपूर्ति करती है.

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जहां, सौर और पवन ऊर्जा मौसम पर निर्भर होते हैं, वहीं परमाणु ऊर्जा बिना किसी दिक्कत के बिजली की आपूर्ति कर सकती है. सांचेज ने कहा कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि अधिक परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल से 28 अप्रैल की घटना को टाला जा सकता था.

बर्लिन के ऊर्जा अनुसंधान केंद्र, हेल्महोल्त्स सेंटर में सौर ऊर्जा विभाग के प्रमुख, रुटगर श्लाटमान ने कहा कि सौर ऊर्जा के खिलाफ अटकलें लगाने के लिए इस घटना का इस्तेमाल करना तथ्य आधारित नहीं बल्कि राजनीति आधारित है. श्लाटमान ने यह भी बताया कि बिजली ग्रिड में अक्षय ऊर्जा का उच्च प्रतिशत कोई नई बात नहीं है, "ऐसा पहले भी कई बार हुआ है.”

पिछले महीने की शुरुआत में ही स्पेन ने एक कार्य दिवस की बिजली मांग को केवल अक्षय स्रोतों से पूरा किया था.

श्लाटमान ने यह भी बताया कि जर्मनी जैसे देशों में भी बिजली का एक बड़ा हिस्सा अक्षय ऊर्जा स्रोतों से आता है. इसके बावजूद वह दुनिया की सबसे स्थिर बिजली प्रणालियों वाले देशों में से एक हैं.

ग्रिड की स्थिरता कैसे बढ़ाई जा सकती है?

विशेषज्ञों का मानना है कि स्पेन में हुआ ब्लैकआउट अक्षय ऊर्जा स्रोतों की बजाय ग्रिड स्थिरता की समस्या को उजागर करता है. श्लाटमान ने कहा, "मुख्य समस्या यह है कि बिजली ग्रिड की प्रणाली अभी तक बड़े पैमाने पर अक्षय ऊर्जा स्रोतों की ओर हो रहे बदलाव के अनुकूल नहीं हो पाई है.” उन्होंने यह भी बताया कि आज के समय में भी कई बिजली ग्रिड पुराने जीवाश्म ईंधन आधारित ढांचे के अनुरूप हैं.

बिजली ग्रिड को इंसानों द्वारा बनाया गया सबसे जटिल तंत्र माना जाता है. इसमें जनरेटर, ट्रांसमिशन और वितरण लाइनों का एक जटिल नेटवर्क होता है. सुचारू रूप से चलाने के लिए इनके बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी होता है.

परमाणु, कोयला और गैस आधारित पावर प्लांट्स में भारी स्टील जनरेटर होते हैं, जो बड़ी घूर्णनशील ऊर्जा (इनर्शिया) प्रदान करते हैं. यह ऊर्जा ग्रिड में होने वाले उतार-चढ़ाव के दौरान स्थिरता बनाए रखने में मदद करती है.

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पोट्सडाम इंस्टीट्यूट फॉर क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च के वरिष्ठ वैज्ञानिक, रॉबर्ट पीट्स्कर बताते है कि अब जब यह सब ग्रिड से हटाया जा रहा है, तो बिजली प्रणाली का सिस्टम भी बदल रहा है. अब इसको स्थिरता प्रदान देने वाली तकनीक को भी तेजी से बदलना जरूरी है. "आप वर्चुअल इनर्शिया का इस्तेमाल कर सकते है जैसे कि ग्रिड बनाने की क्षमता रखने वाले इन्वर्टर.”

ग्रिड बनाने की क्षमता रखने वाले इन्वर्टर, बिजली प्रणाली में "सिंथेटिक इनर्शिया” (बनावटी घूर्णनशील ऊर्जा) बना सकते हैं. जिससे बिजली में आने वाले उतार-चढ़ाव को स्थिर किया जा सकता है.

श्लाटमान बताते हैं कि सिंथेटिक इनर्शिया बनाने वाली तकनीक, जिससे बिजली भंडारण और नियंत्रण को बेहतर किया जा सकता है, वह पहले से उपलब्ध है. लेकिन राष्ट्रीय या यूरोपीय स्तर पर इसे अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है.

इसके अलावा और भी कई तरह की कामगार तकनीकें मौजूद हैं, जो स्थिरता लाने में मददगार साबित हो सकती हैं. जैसे फ्लाईव्हील्स, जिसका सबसे बड़ा सिस्टम आयरलैंड में है. फ्लाईव्हील्स में बेलनाकार रोटर होते हैं, जो बहुत तेजी से घूमते हुए अपने अंदर काइनेटिक एनर्जी (गतिज ऊर्जा) पैदा करते है, जिसे जरूरत पड़ने पर तुरंत इस्तेमाल किया जा सकता है.

जर्मनी के वुपर्टाल इंस्टीट्यूट में ऊर्जा, परिवहन और जलवायु नीति विभाग के प्रमुख, स्टेफान थोमास ने बताया कि बेहतर बैटरी भंडारण और ग्रिड प्रणाली में लचीलापन लाना बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा, "पड़ोसी देशों के साथ अधिक कनेक्शन होने चाहिए ताकि बिजली के सिस्टम को 50 हर्ट्ज पर बनाये रखने में मदद मिल सके.” यूरोप की बिजली ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने के लिए 50 हर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी आवश्यक है.

थोमास ने जर्मनी को उदाहरण देते हुए कहा वह अन्य देशों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है. इसके कारण उसकी बिजली प्रणाली काफी स्थिर है.

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन, जो ऊर्जा स्टोर कर सकते हैं और जरूरत पड़ने पर ग्रिड में वापस बिजली सप्लाई कर सकते हैं, वह ग्रिड में लचीलापन लाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.

पीट्स्कर ने कहा कि उत्तरी यूरोप जैसा क्षेत्र, जहां कई बार लंबे समय तक तेज हवा या सूरज नहीं होता है, वहां बैकअप के लिए हाइड्रोजन टर्बाइनों जैसे स्रोतों का उपयोग करना जरूरी हो सकता है.

अक्षय ऊर्जा में भारी निवेश, लेकिन ग्रिड में अधिक निवेश की जरूरत

इलेक्ट्रिक वाहन, चिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एयर कंडीशनिंग जैसी तकनीकों के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ रही है.

रॉबर्ट पीट्स्कर का कहना है कि कम कार्बन उत्सर्जन वाली और स्थिर ग्रिड प्रणाली के लिए तकनीकी समाधान उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा, "आज सिस्टम की समझ के साथ आप ऐसी स्थिर प्रणालियां डिजाइन कर सकते हैं, जो अक्षय ऊर्जा पर आधारित होते हुए भी मजबूत हो.”

हालांकि ग्रिड स्थिरता कुछ हद तक यूरोप में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार को धीमा कर रही है, फिर भी यूरोपीय आयोग इस दिशा में अधिक पारस्परिक जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए तेजी से कदम उठा रहा है.

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार, वैश्विक स्तर पर ग्रिड में निवेश को 2030 तक दोगुना करना होगा, यानी सालाना 600 अरब डॉलर से भी अधिक निवेश की आवश्यकता होगी. 2010 से अब तक ग्रिड में सालाना निवेश लगभग स्थिर बना हुआ है, जबकि अक्षय ऊर्जा में निवेश लगभग दोगुना हो गया है.

स्पेन में हुए ब्लैकआउट के बाद देश के ग्रिड ऑपरेटर के पूर्व अध्यक्ष, जोर्डी सेविल्ला ने स्पैनिश मीडिया को बताया कि यह स्पष्ट है कि देश की ग्रिड प्रणाली को नए ऊर्जा स्रोतों के अनुसार ढालने के लिए निवेश की आवश्यकता है.