देश की खबरें | हुड्डा ने यौन उत्पीड़न के आरोपी मंत्री के इस्तीफे की मांग की

चंडीगढ़, 12 जनवरी कांग्रेस नेता एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी राज्य के मंत्री संदीप सिंह के तत्काल इस्तीफे की बृहस्पतिवार को मांग की और कहा कि यदि वह (सिंह) मंत्री पद पर बने रहते हैं तो निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।

हुड्डा ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और विकास कार्यों के निष्पादन के मामले में मनोहर लाल खट्टर सरकार की उपलब्धि शून्य है।

उन्होंने कहा कि मंत्री संदीप सिंह को अविलंब नैतिक आधार पर मंत्री पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके इस्तीफे के बिना निष्पक्ष जांच संभव नहीं होगी।

भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान सिंह के खिलाफ जूनियर एथलेटिक्स कोच ने यौन उत्पीड़न की शिकायत की है। सिंह ने चंडीगढ़ में अपने निवास-सह-कैंप कार्यालय में उसे कथित तौर पर प्रताड़ित किया, जहां वह किसी आधिकारिक काम के लिए उनसे मिलने गई थी।

चंडीगढ़ पुलिस ने महिला कोच की शिकायत के आधार पर सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

सिंह की शिकायत पर हरियाणा के पुलिस महानिदेशक द्वारा गठित समिति के बारे में हुड्डा ने कहा, ‘‘हरियाणा एसआईटी (विशेष जांच दल) किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा।’’

हरियाणा के पुलिस महानिदेशक पीके अग्रवाल ने सिंह के खिलाफ शिकायत की जांच के लिए तीन-सदस्यीय समिति का गठन किया है।

हुड्डा ने कहा, ‘‘मैं उन्हें (सिंह को) दोषी या निर्दोष नहीं ठहरा रहा हूं, लेकिन मैं यह कह रहा हूं कि महिला कोच द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्हें नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए, लेकिन मैं (यह भी) जानता हूं कि इस सरकार में नैतिकता बची ही नहीं है।’’

कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘इस मामले की तरह, हमने कई मामले देखे हैं, जिन्हें एसआईटी के नाम पर दबा दिया गया था। वर्तमान सरकार के कार्यकाल के दौरान, एसआईटी का मतलब ‘स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम’ नहीं, बल्कि ‘सप्रेस द इंटर्नल ट्रूथ’ हो गई है।’’

उन्होंने कहा कि अगर सरकार निष्पक्ष जांच कराने में सक्षम नहीं है तो उन्हें मामले को सीबीआई को सौंप देना चाहिए या उच्च न्यायालय की निगरानी में जांच की जानी चाहिए।

गौरतलब है कि खट्टर ने सोमवार को दोहराया था कि सिर्फ आरोप लगाने से कोई दोषी नहीं हो जाता और सिंह अब भी मंत्री हैं।

हुड्डा ने खट्टर सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘परिवार पहचान पत्र’ के संदर्भ में कहा कि यह योजना लोगों के लिए ‘स्थायी परेशानी पत्र’ के रूप में बदल गयी है।

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि खट्टर सरकार ने 10 लाख परिवारों के राशन कार्ड रद्द कर दिए हैं और कुछ परिवारों की आय में 8-10 गुना वृद्धि दिखाई गई है। उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि चार से पांच साल तक के बच्चों के राशन कार्ड को भी 15 हजार से 20 हजार रुपये की सालाना आय दिखाकर रद्द कर दिया गया।’’

उन्होंने नौकरियों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा और दावा किया कि हरियाणा में बेरोजगारी दर 37 प्रतिशत से अधिक है।

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