HP: हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बच्चे बने ‘‘विधायक’’, मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को डेढ़ घंटे तक स्कूली छात्रों ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सदन में एक मॉक सत्र में हिस्सा लिया, जिसमें ‘‘विपक्षी विधायक’’ आसन के समक्ष आ गए.

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू (Photo: Twitter)

शिमला, 12 जून हिमाचल प्रदेश विधानसभा में सोमवार को डेढ़ घंटे तक स्कूली छात्रों ने मादक पदार्थ तस्करों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर सदन में एक मॉक सत्र में हिस्सा लिया, जिसमें ‘‘विपक्षी विधायक’’ आसन के समक्ष आ गए. राज्य के शिक्षा विभाग को मिले 1,085 आवेदनों में से चुने गए बच्चों को ‘एक दिन’ का विधायक माना गया जिन्होंने विधानसभा के बाल सत्र में हिस्सा लिया.

पहली बार, हिमाचल प्रदेश को एक महिला ‘‘मुख्यमंत्री’’ मिली और यह पद जाह्नवी को मिला. यह भी पढ़ें: PM मोदी-CM योगी की तारीफ करना शख्स को पड़ा भारी, बहस होने पर बोलेरो चालक ने दूल्हे के चाचा पर गाड़ी चढ़ाकर मार डाला- Video

सत्र में विपक्षी दल के विधायकों ने कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों की स्थिति इतनी गंभीर है कि आज माता-पिता अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने से भी डरते हैं, और राज्य सरकार इस मुद्दे पर अंकुश लगाने के नाम पर सिर्फ कुछ तस्करों को गिरफ्तार कर रही है.

राज्य सरकार को "आश्वासन की सरकार" करार देते हुए, उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए और राज्य में नशीली दवाओं के खतरे को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की मांग करते हुए वे आसन के समक्ष आ गए.

जाह्नवी ने मामले में गृह मंत्री को कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए कहा, ‘‘हम विपक्षी नेताओं की चिंता से वाकिफ हैं। नेता प्रतिपक्ष को मेरा जवाब औपचारिकता लग सकता है, लेकिन मेरी सरकार लोगों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है.’’

इससे पहले, एक सवाल के जवाब में उपमुख्यमंत्री तुषार आनंद ने सदन को बताया कि हिमाचल प्रदेश में 91 'नशा मुक्ति केंद्र' हैं.

प्रश्नकाल के दौरान विधायकों ने युवाओं की करियर काउंसलिंग, पर्यावरण संरक्षण, स्वास्थ्य और खेल सुविधाएं, पानी के मुद्दे, राज्य की वित्तीय सेहत, मंदिर की सड़कों की खराब स्थिति, पेपर लीक और पार्किंग की जगह की कमी सहित अन्य विषयों पर भी कई सवाल उठाए.

बच्चों का आचरण और अनुशासन विधायकों के लिए एक सबक के रूप में काम कर सकता है.

दिलचस्प बात यह है कि विधानसभा में लड़कियों का दबदबा था और 68 में से केवल 28 विधायक लड़के थे.

बाद में, छात्रों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने अपने शासन में महिलाओं की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस बार हिमाचल प्रदेश के पंचायत चुनावों में निर्वाचित उम्मीदवारों में 37 फीसदी महिलाएं हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि शिमला नगर निगम के 36 पार्षदों में से 21 महिलाएं हैं. कांग्रेस नेता ने कहा कि राज्य सरकार बच्चों के सुझाव के अनुसार स्कूलों में 10 मिनट का योग शुरू करने के बारे में सोचेगी.

विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के तत्वावधान में आयोजित तीन महीने लंबे अभियान 'बच्चों की सरकार कैसी हो' में लगभग 50,000 प्रतिभागियों ने भाग लिया था.

बाल विधायकों में से ज्यादातर सरकारी स्कूलों से थे, जो हिमाचल के 43 विधानसभा क्षेत्रों के 63 स्कूलों से थे. एक-एक बाल विधायक उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान और जम्मू कश्मीर से था.

ऐतिहासिक ‘बाल सत्र’ विश्व बाल श्रम निषेध दिवस पर आयोजित किया गया. इसका उद्देश्य नागरिकों के अधिकारों सहित अन्य ज्वलंत मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक साक्षरता के बारे में बच्चों को संवेदनशील बनाना था.

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