नयी दिल्ली, 27 सितंबर खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि उत्पादों और सेवाओं में उच्च गुणवत्ता मानक भारत को वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने की महत्वाकांक्षा पूरी करने में मदद करेंगे।
इसके साथ ही गोयल ने कहा कि गुणवत्ता मानकों से इनके प्रवर्तन की सशक्त पारिस्थितिकी बनाने में मदद मिलनी चाहिए और उन्हें सभी हितधारक समूहों के साथ व्यापक परामर्श के बाद विकसित किया जाना चाहिए।
गोयल ने राष्ट्रीय मानकीकरण प्रशिक्षण संस्थान (एनआईटीएस) में भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) की तकनीकी समिति के सदस्यों के लिए आयोजित कार्यशाला में कहा कि मानक घरेलू व्यापार एवं निर्यात की आधारशिला होने के साथ देश की वृद्धि में योगदान देने वाले नवाचार एवं दक्षता के सूत्रधार हैं।
एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, गोयल ने कहा कि भारतीय मानक तैयार करने वाली तकनीकी समितियों पर यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है कि मानकों में स्थिरता के सिद्धांत समाहित हों, नकली उत्पादों के खिलाफ कार्रवाई की सुविधा हो और एमएसएमई एवं स्टार्टअप कंपनियों को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिले।
गोयल ने कहा कि तकनीकी समिति के प्रत्येक सदस्य को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारतीय मानक देश में नवीनतम तकनीकी प्रगति को परिलक्षित करें और वे अंतरराष्ट्रीय मानकों के समतुल्य हों।
उन्होंने कहा, ‘‘ऐसा होने पर ही भारत दुनिया का विनिर्माण केंद्र बनने के लक्ष्य को हासिल कर पाएगा और आत्मनिर्भर भारत बनने की आकांक्षा पूरी कर पाएगा।’’
मानक ब्यूरो तकनीकी समितियों में पारदर्शी परामर्श के जरिये भारतीय मानक तैयार करता है। इन समितियों में उद्योग, उपभोक्ताओं, शिक्षाविदों, शोध एवं विकास संस्थानों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और मंत्रालयों/ नियामकों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं।
बीआईएस में लगभग 400 स्थायी तकनीकी समितियां हैं जो 16 व्यापक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मानकीकरण कर रही हैं। तकनीकी समिति के सदस्य यह सुनिश्चित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं कि मानकीकरण प्रक्रिया अच्छी तरह काम करे।
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