अहमदाबाद, 13 दिसंबर गुजरात सरकार ने बुधवार को कहा कि वह अक्टूबर 2022 में मोरबी में पुल गिरने के मामले में ओरेवा ग्रुप के सीएमडी जयसुख पटेल को जमानत देने या न देने पर फैसला उच्च न्यायालय के विवेक पर छोड़ रही है।
न्यायमूर्ति दिव्येश जोशी ने पीड़ितों के रिश्तेदार याचिकाकर्ताओं और सरकार की दलीलें सुनने के बाद जमानत पर फैसला सुरक्षित रख लिया।
गुजरात के मोरबी कस्बे में मच्छू नदी पर बना पुल 30 अक्टूबर 2022 को गिर गया था, जिसके चलते महिलाओं और बच्चों समेत 135 लोगों की मौत हो गई थी।
ब्रिटिश काल के इस पुल के रखरखाव और संचालन का जिम्मा ओरेवा ग्रुप के पास था, इसलिए इस घटना से संबंधित आपराधिक मामले में जयसुख पटेल को आरोपी बनाया गया।
अतिरिक्त महाधिवक्ता मितेश अमीन ने अदालत को बताया कि जांचकर्ताओं ने 18 सिंतबर को सत्र अदालत को सूचित किया था कि घटना की हर पहलू से जांच की जा रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘पीड़ित और आवेदक दोनों पक्षों ने फैसला (उच्चतम न्यायालय का) पेश किया है। किसी फैसले के आधार पर जमानत याचिका पर निर्णय नहीं किया जा सकता, यह (याचिका पर सुनवाई) हमेशा अदालत के विवेक पर निर्भर करता है।’’
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