देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने अश्लीलता की परिभाषा में प्रगतिशील रुख पर दिया जोर, आपराधिक मामला खारिज किया

मुंबई, 12 अक्टूबर बम्बई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ ने एक पार्टी में 'छोटे कपड़े पहने' महिलाओं को नाचते हुए देखने को लेकर पांच पुरुषों के खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले को रद्द करते हुए कहा कि वह इसको लेकर प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना चाहती है कि अश्लीलता के दायरे में क्या आता है।

न्यायमूर्ति विनय जोशी और न्यायमूर्ति वाल्मीकि एस ए मेनेजेस की खंडपीठ ने नागपुर जिले में उमरेड पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी बुधवार को रद्द करते हुए कहा कि अदालत नैतिकता के प्रचलित मानदंडों के साथ ही इसको लेकर सचेत है कि वर्तमान समय में किस तरह के पहनावे को सामान्य और स्वीकार्य माना जाता है।

प्राथमिकी के अनुसार, 31 मई, 2023 को पुलिस ने उमरेड इलाके में एक जगह पर छापा मारा और पाया कि कुछ लोग छोटे कपड़े पहने महिलाओं को अश्लील नृत्य करते हुए देख रहे थे और उन पर जाली नोटों बरसा रहे थे।

प्राथमिकी में महिलाओं समेत 18 लोगों के नाम शामिल हैं। इसके बाद आरोपियों ने मामले को रद्द करने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया।

उच्च न्यायालय ने आदेश में कहा, ‘‘कौन से कृत्य अश्लीलता के दायरे में आ सकते हैं, इस बारे में एक संकीर्ण दृष्टिकोण रखना, हमारी ओर से एक प्रतिगामी कृत्य होगा। हम मामले में प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनाना पसंद करेंगे और इस तरह का निर्णय पुलिस अधिकारियों के हाथों में छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं।’’

अदालत ने कहा कि आरोपी महिलाओं की हरकतें, जो कथित तौर पर छोटी स्कर्ट पहने हुए थीं और उत्तेजक नृत्य कर रही थीं या 'अश्लील' इशारे कर रही थीं, को "अपने आप में अश्लील हरकतें" नहीं कहा जा सकता, जो जनता के किसी भी सदस्य को परेशान कर सकती हैं।

अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा मानते हुए, हम वर्तमान भारतीय समाज में प्रचलित नैतिकता के सामान्य मानदंडों के प्रति सचेत हैं और इस तथ्य पर न्यायिक संज्ञान लेते हैं कि वर्तमान समय में यह काफी सामान्य और स्वीकार्य है कि महिलाएं ऐसे कपड़े पहन सकती हैं, या तैराकी के समय धारण किए जाने वाले परिधान या ऐसी अन्य पोशाक पहन सकती हैं।’’

अदालत ने कहा कि ऐसा पहनावा अक्सर फिल्मों या सौंदर्य प्रतियोगिताओं में देखा जाता है। उच्च न्यायालय ने कहा, ‘‘निश्चित रूप से ऐसी स्थिति पर भारतीय दंड संहिता की धारा 294 (अश्लील कृत्य) के प्रावधान लागू नहीं होंगे।’’

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