मुंबई, 28 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पुणे पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को हत्या के एक आरोपी के आधार विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग की गई थी। आरोपी के अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो आधार कार्ड थे।
आरोपी ने गिरफ्तारी के वक्त जो आधार कार्ड जमा किया था उसमें जन्मवर्ष 1999 था जबकि पुणे की निचली अदालत में जो आधार कार्ड जमा किया उसमें जन्मवर्ष 2003 है। दोनों कार्ड पर 12 अंकों की संख्या समान है।
निचली अदालत ने वर्ष 2020 में गिरफ्तार आरोपी का जन्मवर्ष 2003 मानते हुए उसे नाबालिग के तौर पर किशोर न्याय बोर्ड की निगरानी में भेज दिया।
पुलिस ने पुणे की अदालत के आदेश को चुनौती देने के बजाए उच्च न्यायालय में यूआईडीएआई को उन दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का निर्देश देने की मांग के साथ याचिका दायर की जिनके आधार पर ये आधार कार्ड जारी किए गए थे।
उच्च न्यायालय की पीठ ने कहा कि पुलिस आरोपी के खिलाफ अलग-अलग जानकारी के तहत दो आधार कार्ड रखने को लेकर मामला दर्ज कर सकती है।
यूआईडीएआई की तरफ से मौजूद वकील सुशील हलवासिया ने न्यायालय को बताया कि ऐसे बहुत से लोग हैं जो फर्जी आधार कार्ड बनाने में विशेषज्ञ है।
पीठ ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा,''फिर इसे विशिष्ट क्यों कहा जाता है?, आपको जांच करनी चाहिए। एंटीलिया मामले में, एक पुलिस अधिकारी के पास दो आधार कार्ड थे। उसका नाम समान था लेकिन दो आधार कार्ड थे।''
हलवासिया ने बताया कि आधार कार्ड पहचान पत्र है ना कि उम्र का प्रमाण पत्र।
यूआईडीएआई की दलीलों को सुनने के बाद पीठ ने कहा कि पुणे पुलिस के मामले में कोई आधार नहीं है और पुलिस से पूछा कि उसने पुणे अदालत के फैसले को चुनौती क्यों नहीं दी।
इसके बाद उसने पुणे पुलिस की याचिका को खारिज कर दिया।
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