प्रयागराज, 21 अक्टूबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) को भोवापुर बस्ती की सार्वजनिक जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण कर बनाए गए मकानों को अगले आदेश तक ध्वस्त नहीं करने का निर्देश दिया है।
साथ ही अदालत ने जीडीए को सुनवाई की अगली तारीख तक भोवापुर बस्ती के निवासियों के पुनर्वास के लिए एक पूर्ण योजना का प्रस्ताव पेश करने का निर्देश भी दिया है।
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अदालत ने निर्देश दिया कि गाजियाबाद का जिला प्रशासन भोवापुर बस्ती के उन बाशिंदों को अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराए जिनके मकान पहले ही ध्वस्त किए जा चुके हैं और उन लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान उपलब्ध कराने की व्यावहारिकता देखे।
मुख्य न्यायाधीश गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की पीठ ने गाजियाबाद के निवासी देवपाल की जनहित याचिका पर यह आदेश दिया। इस मामले की अगली सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
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पीठ ने अपने निर्देशों में आगे कहा कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण अगले आदेश तक भोवापुर बस्ती के निवासियों को लाइट और पानी सहित आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक इंतजाम करे।
याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत को बताया कि मंगलवार को करीब 150 मकानों को पहले ही ध्वस्त किया जा चुका है और जिन लोगों के मकान ढहाए गए हैं, उनके पास सिर छिपाने के लिए छत नहीं है और वे खुले आसमान के नीचे जीवन बिता रहे हैं।
वकील ने कहा कि जीडीए मनमाने ढंग से काम कर रहा है और वे अगले कुछ दिनों में बाकी मकानों को भी ढहा सकते हैं। कानून के मुताबिक इस बस्ती के लोगों को आवास की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराए बगैर बेघर नहीं किया जा सकता।
अदालत ने विभिन्न निर्देश पारित करते हुए कहा, “प्रथम दृष्टया हम इस बात से संतुष्ट हैं कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को मकान खाली कराने और मकानों को ढहाने से पूर्व भोवापुर बस्ती के निवासियों के पुनर्वास के लिए एक स्थान की पेशकश करनी चाहिए थी।”
पीठ ने कहा, “जब पूरी दुनिया महामारी का सामना कर रही है, तो यह राज्य की जिम्मेदारी है कि वह हर किसी का, खासकर गरीब तबके का, संरक्षण करे जिससे लोगों की मुश्किलें और नहीं बढ़ें।”
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