देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने एनआईए, महाराष्ट्र सरकार से पूछा, क्या वरवर राव का परिवार उनसे मिल सकता है
एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

मुंबई, 20 जुलाई बंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) और महाराष्ट्र सरकार को निर्देश दिया कि वे एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में आरोपी कवि वरवर राव की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में अवगत कराएं और साथ में यह भी बताएं कि क्या आरोपी के परिवार को ‘‘एक उचित दूरी से’’ उनसे मिलने की अनुमति दी जा सकती है।

अदालत ने यह निर्देश तब दिया जब राव के वकील ने अदालत से कहा कि कार्यकर्ता ‘‘लगभग मृत्यु शय्या’’ पर हैं।

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राव (81) इस समय यहां नानावती अस्पताल में भर्ती हैं। वह इस महीने के शुरू में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इसके अलावा वह अन्य कई बीमारियों से भी पीड़ित हैं।

न्यायमूर्ति एस एस शिन्दे और न्यायमूर्ति एस पी तावडे की खंडपीठ ने एनआईए और राज्य सरकार से राव की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में अवगत कराने और 22 जुलाई तक यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या उनके परिवार के सदस्यों को उनसे मिलने की अनुमति दी जा सकती है।

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राव के वकील सुदीप पसबोला ने अदालत से कहा कि कार्यकर्ता ‘‘लगभग मृत्यु शय्या’’ पर हैं।

पसबोला ने कहा, ‘‘उनकी (राव) हालत काफी गंभीर है। जब वह जे जे अस्पताल में थे तो उन्होंने अपना सिर बिस्तर में मार लिया और उन्हें गंभीर चोट आई थी। कोविड-19 के अतिरिक्त वह अन्य कई बीमारियों से भी पीड़ित हैं।’’

उन्होंने राव को जमानत देने का आग्रह किया और कहा, ‘‘उनके दिन गिनती के बचे हैं, और यदि उन्हें मरना है तो कम से कम उन्हें उनके परिवार की मौजूदगी में मरने दिया जाए।’’

अदालत ने इस पर कहा कि यदि उनकी हालत इतनी गंभीर है तो क्या उन्हें अस्पताल से बाहर ले जाना जोखिम भरा नहीं होगा? वह कोविड-19 से भी पीड़ित हैं। ऐसे में वह परिवार से कैसे मिल सकते हैं?

पसबोला ने कहा कि यदि अनुमति मिलती है तो राव का परिवार सावधानी बरत सकता है और उन्हें एक निश्चित दूरी से देख सकता है।

सरकारी वकील दीपक ठाकरे ने अदालत से कहा कि राव के परिवार के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की व्यवस्था की जा सकती है।

एनआईए की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि जहां तक वह जानते हैं, कोविड-19 के रोगियों को किसी से भी मिलने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

उन्होंने कहा कि राव शहर के सर्वश्रेष्ठ मल्टी स्पेशलिटी अस्पतालों में से एक में भर्ती हैं और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप उनकी देखभाल की जा रही है।

अदालत ने एनआईए और राज्य सरकार से विवरण मांगते हुए पूछा, ‘‘क्या उनका (राव) परिवार उन्हें अस्पताल में एक उचित दूरी से देख सकता है?’’

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