देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार से असोला अभयारण्य, सेंट्रल रिज में अतिक्रमण के बारे में बताने को कहा

नयी दिल्ली, 11 जनवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को दिल्ली सरकार को इस बारे में बताने को कहा कि क्या असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य और सेंट्रल रिज वन में कोई अतिक्रमण हुआ है।

उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि वन भूमि अतिक्रमण मुक्त हो, और वन क्षेत्र में कथित तौर पर निर्मित अवैध कॉलोनियों के संबंध में अदालतों द्वारा जारी स्थगन आदेश से उसे अवगत कराया जाए।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा, ‘‘ऐसा नहीं हो कि किसी स्थगन आदेश के बिना वन क्षेत्र में 700 अवैध कॉलोनियां मौजूद हों। कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए। जमीन अतिक्रमण मुक्त होनी चाहिए।’’

पीठ ने दिल्ली सरकार को एक संक्षिप्त हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा कि असोला भाटी वन्यजीव अभयारण्य और सेंट्रल रिज में कोई अतिक्रमण नहीं है।

उच्च न्यायालय दिल्ली में वायु की खराब गुणवत्ता की समस्या पर एक जनहित याचिका की सुनवाई कर रहा है। इस विषय का अदालत ने स्वत: संज्ञान लिया और विषय में इसकी सहायता करने के लिए एक न्याय मित्र नियुक्त किया था।

मामले में न्याय मित्र एवं वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश वासुदेव ने दलील दी कि राष्ट्रीय राजधानी में करीब 1,770 अवैध कॉलोनियां हैं जिन्हें नियमित करने की मांग की गई है। इनमें से करीब 700 ग्राम भूमि और वन क्षेत्रों में है।

न्याय मित्र ने अदालत को दक्षिणी रिज के अंदर छतरपुर में कथित अवैध निर्माण गतिविधियों के बारे में बताया।

उच्च न्यायालय ने इससे पहले कहा था कि राष्ट्रीय राजधानी में वन क्षेत्र घट रहा है और प्रकृति के साथ अन्याय किया जा रहा है।

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