देश की खबरें | उच्च न्यायालय ने 24 साल पुराने मामले में व्यक्ति को बरी किया, 15 साल से लंबित थी अपील

नयी दिल्ली, 13 मई दिल्ली उच्च न्यायालय ने शादी के लिए महिला को मजबूर करने के इरादे से उसका अपहरण करने के 24 साल पुराने मामले में दोषी करार दिए गए एक व्यक्ति को बरी कर दिया है।

बरी किए गए व्यक्ति की अपील 2007 से उच्च न्यायालय में लंबित थी। अदालत ने अपील के निस्तारण में हुई देरी पर ‘‘गंभीर’’ चिंता जताई।

अदालत ने जसबीर सिंह नामक व्यक्ति की अपील को स्वीकार कर लिया जिसने महिला को शादी के लिए मजबूर करने के इरादे से उसका अपहरण करने और धमकी देने के मामले में मिली तीन साल के कारावास की सजा को चुनौती दी थी। अदालत ने व्यक्ति की अपील पर फैसला देते हुए कहा कि साक्ष्य सामग्री की सही पड़ताल नहीं की गई और अभियोजन पक्ष के गवाहों की गवाही में कई विरोधाभास हैं, साथ ही प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी का भी कोई जवाब नहीं है।

न्यायमूर्ति चंद्रधारी सिंह ने रेखांकित किया कि अपील उच्च न्यायालय में वर्ष 2007 से लंबित थी। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय में लंबित अपील के निस्तारण में देरी चिंता का विषय है। मामला सितंबर 1998 का है। लड़की के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनकी 15 साल की बेटी फल और सब्जी खरीदने गई थी लेकिन वापस नहीं लौटी।

बाद में लड़की को 25 नवंबर 1998 को मध्य प्रदेश के एक गांव से बरामद किया गया और पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया।

दर्ज मामले के अनुसार, लड़की ने अपने बयान में बताया कि आरोपी जसबीर उससे मिला था और कहा कि उसकी दोस्त उसे बस अड्डे पर बुला रही है लेकिन जब वह वहां पहुंची तो कोई नहीं था। लड़की ने बताया कि वहां दो अन्य आरोपी मौजूद थे। उसने दावा किया कि उसे धमकाकर एक कमरे में ले जाया गया और आरोपियों में से एक व्यक्ति ने नियमित तौर पर उसे धमकी दी तथा दुष्कर्म किया।

मामले में जसबीर सहित तीनों आरोपियों के खिलाफ निचली अदालत में मुकदमा चला और जसबीर को शादी के लिए महिला का अपहरण करने तथा धमकी देने का दोषी ठहराया गया।

उच्च न्यायालय ने आरोपी को बरी करते हुए कहा कि प्राथमिकी दो दिन की देरी से दर्ज की गई और इस देरी का कारण स्पष्ट नहीं है।

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