नयी दिल्ली, 19 जून उच्चतम न्यायालय चेन्नई के एक सरकारी अस्पताल में उपचार करा रहे तमिलनाडु के मंत्री वी. सेंथिल बालाजी को किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति संबंधी मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की याचिका पर 21 जून को सुनवाई करेगा।
तमिलनाडु के बिजली, मद्य-निषेध एवं आबकारी मंत्री को दिवंगत जे. जयललिता के नेतृत्व वाली पूर्ववर्ती अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) सरकार के दौरान नौकरी घोटाले के सिलसिले में धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत ईडी द्वारा 14 जून को गिरफ्तार किया गया था।
बालाजी तत्कालीन जयललिता सरकार में परिवहन मंत्री थे।
उच्च न्यायालय ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से एक सरकारी अस्पताल में उपचाराधीन बालाजी को निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की 15 जून को अनुमति दी थी।
बालाजी की पत्नी की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रहे उच्च न्यायालय ने अंतरिम आदेश दिया था। उसने बालाजी की कथित अवैध गिरफ्तारी से जुड़ी मुख्य याचिका पर भी निदेशालय को नोटिस जारी किया था और मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तिथि तय की थी। बालाजी को बाईपास सर्जरी की चिकित्सकीय सलाह दी गयी है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष इस मामले का विशेष उल्लेख किया और तत्काल सुनवाई किए जाने का अनुरोध किया।
मेहता ने पीठ से कहा कि बालाजी एक प्रभावशाली मंत्री हैं और उच्च न्यायालय ने उन्हें एक निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है।
शीर्ष अदालत ने याचिका पर विचार करने को लेकिर अनिच्छा व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च न्यायालय को बालाजी की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर पहले अंतिम आदेश पारित करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा जारी रिमांड आदेश के आधार पर आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया था कि प्रवर्तन निदेशालय बालाजी के स्वास्थ्य से कोई समझौता किए बिना और डॉक्टर की सलाह से ही उनसे पूछताछ कर सकता है। उन्होंने दलील दी कि इस आदेश ने पूछताछ को निरर्थक बना दिया है।
शीर्ष अदालत ने तब मामले की सुनवाई के लिए 21 जून की तारीख तय की।
शीर्ष अदालत के समक्ष अपनी याचिका में, ईडी ने कहा कि उच्च न्यायालय ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर विचार करने में गलती की है।
अदालत ने कहा था कि बालाजी न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे और उसने जांच एजेंसी को मंत्री के स्वास्थ्य के मद्देनजर चिकित्सकों का अपना दल तैनात करने की भी अनुमति दी थी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY