लखनऊ/नयी दिल्ली, दो अक्टूबर उत्तर प्रदेश सरकार ने कथित सामूहिक बलात्कार एवं हत्या मामले की घटना के संभालने के तरीके को लेकर शुक्रवार को हाथरस के पुलिस अधीक्षक और चार अन्य पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया। वहीं, स्थानीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मीडिया को दलित पीड़िता के गांव में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
तृणमूल कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल को पीड़िता के परिवार से मिलने जाने से रोक दिया गया। प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की ।
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हाथरस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार ने पत्रकारों से कहा, ''मौजूदा हालात के मद्देनजर किसी भी राजनीतिक प्रतिनिधि या मीडिया कर्मी को तब तक गांव में जाने नहीं दिया जाएगा जब तक एसआईटी (विशेष जांच दल) जांच पूरी नहीं कर लेता।''
योगी आदित्यनाथ सरकार 19 वर्षीय महिला के साथ कथित रूप से सामूहिक बलात्कार और उसके बाद उसकी मौत के मामले में विपक्षी दलों के निशाने पर है।
समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को लखनऊ में प्रदर्शन किया, जिनपर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
पार्टी कार्यकर्ताओं ने अलीगढ़, मथुरा और इलाहबाद में भी प्रदर्शन किया।
वहीं दिल्ली में छात्रों, नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक नेताओं ने शाम को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में आम आदमी पार्टी और वाम दलों समेत कई पार्टियों के नेता शामिल हुए।
हाथरस जिले में, तृणमूल कांग्रेस सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल को पीड़िता के गांव से लगभग डेढ़ किलोमीटर पहले ही रोक दिया गया। पार्टी के एक बयान में यह बात कही गई है।
पार्टी सूत्रों ने कहा कि डेरेक ओ'ब्रायन, काकोली घोष दस्तीदार और प्रतिमा मंडल तथा पूर्व सांसद ममता ठाकुर सबकी नजरों से बचकर अलग-अलग कारों से हाथरस आ रहे थे और यहां पहुंचने से 25 किलोमीटर पहले एक साथ हो गए।
वे गांव में प्रवेश करने में तो सफल रहे लेकिन पीड़िता के परिवार से नहीं मिल सके।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि ओ'ब्रायन धक्का दिये जाने के बाद जमीन पर गिर गए जबकि मंडल के साथ एक अधिकारी ने धक्का-मुक्की की। बाद में मंडल ने पुलिस में शिकायत की और धरने पर बैठ गईं।
महिला का 14 सितंबर को कथित रूप से सामूहिक बलात्कार किया गया था। इस दौरान उसे गंभीर चोटें आईं थी। मंगलवार को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उसने दम तोड़ दिया था। इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
इस बीच, राज्य सरकार ने मामले की जांच कर रही एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर हाथरस के एसपी विक्रांत वीर, क्षेत्राधिकारी रामशब्द और तीन अन्य पुलिकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है।
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