चंडीगढ़, 23 दिसंबर पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई जांच में यह बात सामने आयी कि सोनीपत पुलिस ने मजदूर अधिकार कार्यकर्ता शिव कुमार को जनवरी 2021 में अवैध रूप से हिरासत में लेकर प्रताड़ित किया, जबकि उनकी स्वास्थ्य जांच करने वाले सरकारी डॉक्टरों ने “स्पष्ट रूप से पुलिस अधिकारियों के इशारे पर काम किया।”
शिव कुमार के पिता ने अदालत का दरवाजा खटखटाकर यह आरोप लगाया था कि उनके बेटे को पुलिस हिरासत में क्रूरतापूर्वक प्रताड़ित किया गया। इसके बाद अदालत ने मार्च 2021 में न्यायिक जांच का आदेश दिया था। फरीदाबाद के तत्कालीन जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक गुप्ता ने जांच करके हाल ही में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
मजदूर अधिकार संगठन के अध्यक्ष शिव कुमार को हरियाणा पुलिस ने जनवरी 2021 में सोनीपत की एक फैक्टरी के बाहर मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार किया था।
न्यायाधीश ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुमार को अवैध रूप से हिरासत में रखने और प्रताड़ित किए जाने के आरोप उचित तरीके से साबित हुए हैं।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, 16 जनवरी, 2021 को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद कुमार को 23 जनवरी, 2021 तक अवैध रूप से कैद में रखा गया था। रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने कुमार को 23 जनवरी को गिरफ्तार किया गया दिखाया था।
29 पृष्ठ की जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कुमार को पुलिस ने "बुरी तरह से प्रताड़ित" किया था। उनके शरीर के विभिन्न हिस्सों पर कई चोटें आईं थीं।
रिपोर्ट में कहा गया है, "20 फरवरी 2021 को राजकीय मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, सेक्टर 32 (चंडीगढ़) के मेडिकल बोर्ड ने शिव कुमार की मेडिकल जांच की थी लेकिन इससे पहले 24 जनवरी 2021 से लेकर दो फरवरी 2021 के बीच उनकी पांच बार जांच की गई। हालांकि न तो राजकीय अस्पताल, सोनीपत के चिकित्सकों और न ही जेल में तैनात चिकित्सक ने अपनी ड्यूटी निभाई और वे पुलिस अधिकारियों के इशारे पर काम करते रहे।"
रिपोर्ट के अनुसार. "सोनीपत के सरकारी अस्पताल, सोनीपत, जिला जेल के स्वास्थ्य अधिकारियों के अलावा सोनीपत के जेएमआईसी के रूप में तैनात विनय काकरान ने भी अपनी ड्यूटी नहीं निभाई।"
जांच रिपोर्ट में कहा गया है, "ऐसा प्रतीत होता है कि या तो शिव कुमार को मजिस्ट्रेट के सामने भौतिक रूप से पेश नहीं किया गया और उन्हें बाहर पुलिस वाहन में बिठाकर रखा गया, या पेश किया भी गया तो वह पुलिस द्वारा दी गई धमकियों के कारण मजिस्ट्रेट के सामने कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं थे, क्योंकि उन्हें 16 जनवरी, 2021 से लेकर मजिस्ट्रेट के सामने पेश किए जाने तक प्रताड़ित किया गया था।’’
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘अगर मजिस्ट्रेट ने आरोपी शिव कुमार को प्रत्यक्ष तौर पर देखा होता, तो वह उनके शरीर पर चोट के निशान देख सकते थे।"
जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि कुंडली थाने के अतिरिक्त एसएचओ व मामले के जांच अधिकारी शमशेर सिंह और उनसे जुड़े अन्य अधिकारी भी शिव कुमार की प्रताड़ना के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं।
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