गुवाहाटी, चार अप्रैल गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने एकल पीठ के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें लोकसभा सदस्य नव सरनीया को उनकी अनुसूचित जनजाति (मैदान) (एसटी-पी) दर्जे को चुनौती देने वाले एक मामले में अंतरिम राहत प्रदान की गई थी।
सरनीया ने लगातार दो बार कोकराझार लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया है। यह सीट एसटी(पी) समुदाय के लिए आरक्षित है।
मुख्य न्यायाधीश विजय बिश्नोई और न्यायमूर्ति सुमन श्याम की पीठ ने बुधवार को आदेश दिया कि सरनीया द्वारा दायर याचिका को अंतिम निपटारा के लिए एकल न्यायाधीश की पीठ के समक्ष शुक्रवार को सूचीबद्ध किया जाए।
मामले में त्वरित कार्यवाही की जरूरत के मद्देनजर अदालत ने रजिस्ट्री को पांच अप्रैल को ‘‘अंतिम निपटारा’’ के लिए याचिका को एकल पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया। अदालत ने एकल-न्यायाधीश पीठ से जरूरी होने पर रोजाना आधार पर सुनवाई करते हुए याचिका पर विचार करने का आग्रह किया।
यह आदेश असम सरकार और चार अन्य द्वारा सरनीया और प्रतिवादी के रूप में तीन अन्य के खिलाफ दायर मामले में पारित किया गया। एकल-न्यायाधीश पीठ के 27 मार्च, 2024 को आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसने याचिका के निपटारे तक सरनीया की जनजाति दर्जे को प्रभावित करने वाले संबंधित आदेश पर रोक लगा दी थी।
सरनीया 2016 से निर्दलीय सांसद के रूप में कोकराझार निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इस सीट पर तीसरे चरण में सात मई को मतदान होना है। सरनीया के इस सीट से लगातार तीसरी बार चुनाव लड़ने की संभावना है।
सरनीया ने एक याचिका में 12 जनवरी, 2024 के राज्य स्तरीय जांच समिति (एसएलएससी) के आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उन्हें एसटी (पी) समुदाय से संबंधित नहीं माना गया था।
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