अहमदाबाद, दो जुलाई गुजरात पुलिस की अपराध शाखा ने मुंबई के एक व्यापारी को एक जौहरी के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में अहमदाबाद में हिरासत में लिया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
अधिकारी ने बताया कि इस व्यापारी को विमान अपहरण की धमकी भरा नोट छोड़ने के लिए अपहरण रोधी अधिनियम के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में गुजरात उच्च न्यायालय ने उसे बरी कर दिया था।
अधिकारी के मुताबिक, महाराष्ट्र में पोंजी घोटाले में वांछित और एक जौहरी को उसका 13 करोड़ रुपये कीमत का सोना व हीरा न लौटाकर धोखाधड़ी करने के आरोपी बिरजू सल्ला को एक अज्ञात जगह से हिरासत में लिया गया।
पुलिस उपायुक्त (अपराध) अजित राजियन ने कहा, ‘‘सल्ला से फिलहाल अपराध शाखा पूछताछ कर रही है। वह महाराष्ट्र में पोंजी घोटाले में 'वांछित' था। उसे पहले एक विमान के अपहरण की धमकी देने के लिए दोषी ठहराया गया था (और बाद में बरी कर दिया गया था)। बृहस्पतिवार को अधिक जानकारी साझा की जाएगी।’’
एक पुलिस निरीक्षक ने बताया कि मुंबई के ताड़देव इलाके का रहने वाला सल्ला पिछले महीने उसके खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले में फरार था।
पुलिस निरीक्षक ने कहा, ‘‘10 जून को दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, सल्ला ने एक जौहरी से कथित तौर पर उधार लिया गया सोना, चांदी और हीरे नहीं लौटाकर 13 करोड़ रुपये की ठगी की। उस मामले में उसे कभी गिरफ्तार नहीं किया गया। हमने पूछताछ के लिए उसे एक अज्ञात स्थान से हिरासत में लिया है।’’
उन्होंने बताया कि मुंबई की एक अदालत ने हाल ही में सल्ला की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
सल्ला वह पहला व्यक्ति था, जिसके खिलाफ 30 अक्टूबर 2017 को जेट एयरवेज की मुंबई-दिल्ली उड़ान के बिजनेस श्रेणी में कथित तौर पर अपहरण की धमकी वाला नोट छोड़ने के लिए सख्त अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 के तहत मामला दर्ज किया गया था।
अंग्रेजी और उर्दू में लिखे गए इस नोट में कहा गया था, ‘‘विमान में अपहरणकर्ता सवार हैं और उसमें विस्फोटक मौजूद हैं।’’ इसमें मांग की गई थी कि विमान को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की तरफ उड़ाया जाए।
अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि सल्ला ने यह नोट इस उम्मीद में तैयार किया था कि जेट एयरवेज दिल्ली में अपना परिचालन बंद कर देगी और उसकी गर्लफ्रेंड, जो राष्ट्रीय राजधानी में एयरलाइन के कार्यालय में काम करती थी, मुंबई लौट आएगी।
अहमदाबाद में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की विशेष अदालत सल्ला को अपहरण रोधी अधिनियम, 2016 के तहत 11 जून, 2019 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
अगस्त 2023 में गुजरात उच्च न्यायालय ने एनआईए अदालत के आदेश को खारिज कर दिया था और कहा था कि निचली अदालत ने उसे “संदेह से भरे सबूतों के आधार पर” अपहरण के अपराध के लिए सजा सुनाई थी।
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