अहमदबाद, 11 जून इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने एक ट्वीट में एक ब्रिटिश लेखक के 1930 के दशक में दिए एक कथन का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि गुजरात आर्थिक रूप से मजबूत है लेकिन ‘‘सांस्कृतिक रूप से पिछड़ा ’’ है। गुहा के इस ट्वीट के बाद भाजपा के नेताओं ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी ।
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि भारत के लोग इस तरह की ‘‘चाल’’ में नहीं फंसेंगे। हालांकि, गुहा ने कहा कि उनके खिलाफ दिखाया जा रहा गुस्सा उचित नहीं है, क्योंकि वह जिन लोगों के कथन का संदर्भ देते हैं जरूरी नहीं कि वह उनके विचार का समर्थन करते हैं ।
गुहा ने बृहस्पतिवार सुबह ट्वीट किया, ‘‘फिलिप स्प्रैट ने 1939 में लिखा था - गुजरात, भले ही आर्थिक रूप से समृद्ध राज्य हो लेकिन सांस्कृतिक तौर पर पिछड़ा हुआ है...जबकि, बंगाल आर्थिक रूप से पिछड़ा है लेकिन सांस्कृतिक रूप से काफी आगे है। ’’
गुहा के इस ट्वीट के बाद रूपाणी ने दावा किया कि पहले ब्रिटिश ने देश को बांटने और राज करने की कोशिश की। अब कुछ ‘‘विशिष्ट ’’लोग हैं जो भारतीयों को अलग-अलग रूप में बांटना चाहते हैं।
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रूपाणी ने ट्वीट किया, ‘‘पहले ब्रिटिशों ने देश को बांटने और राज करने की कोशिश की। अब कुछ विशिष्ट लोग हैं, जो देशवासियों को अलग-अलग रूप में बांटना चाहते हैं। भारत के लोग ऐसी चाल में नहीं फंसेगे। गुजरात भी महान है, बंगाल भी महान है...भारत एकजुट है । ’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारी सांस्कृतिक बुनियाद मजबूत है और आर्थिक आकांक्षाएं ऊंची हैं।’’
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी ट्विटर पर इस भिड़ंत में शामिल हो गयीं ।
उन्होंने कहा, ‘‘1939 में जब ब्र्रिटेन के कम्युनिस्ट विचाराधारा से जुड़े फिलिप स्प्रैट ने यह लिखा...उस समय गुजरात में क्या हो रहा था...जामनगर...महाराजा जाम साहेब दिग्विजय सिंहजी जाडेजा ने पोलैंड के 1,000 बच्चों की जान बचायी। ’’
सीतारमण ने यूरोप से आए पोलैंड के शरणार्थियों की एक तस्वीर भी डाली जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जामनगर के पूर्व राजघराने ने बचाया था।
विवाद बढ़ने पर गुहा ने कहा, ‘‘जब मैं कोई कथन ट्वीट करता हूं तो वो मुझे अध्ययन के दौरान मिलते हैं। जरूरी नहीं है कि मैं उन विचारों से सहमत हूं। ऐसे में आप अपना गुस्सा या प्यार सिर्फ उस व्यक्ति के लिए ही रखें, जिनका वो कथन है।’’
गुहा और भाजपा के नेताओं के बीच बहस के दौरान कई लोगों ने गुहा के खिलाफ और समर्थन में भी ट्वीट किए।
ब्रिटेन के बुद्धिजीवी स्प्रैट कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया के संस्थापकों में शामिल थे। मेरठ साजिश मामले में भारत के कई वामपंथी नेताओं के साथ स्प्रैट को भी 1929 में जेल में डाल दिया गया था।
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