नयी दिल्ली, एक अगस्त वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि कंपनियों के निदेशकों की तरफ से निजी हैसियत में दी गई सेवाओं पर कंपनियों को रिवर्स चार्ज प्रणाली (आरसीएम) के तहत जीएसटी काटने की जरूरत नहीं होगी।
मंत्रालय ने एक परिपत्र में स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि सिर्फ आधिकारिक हैसियत से किसी निदेशक द्वारा दी गई सेवाएं पर ही आरसीएम के तहत जीएसटी लगेगा।
आरसीएम व्यवस्था के तहत सेवाएं पाने वाली फर्म को भुगतान करते समय जीएसटी काटना होता है।
जीएसटी परिषद की 11 जुलाई को हुई बैठक के बाद निदेशकों की तरफ से निजी हैसियत से दी जाने वाली सेवाओं पर करारोपण को लेकर असमंजस पैदा हो गया था।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि किसी कंपनी या निकाय के निदेशक की तरफ से निजी हैसियत में दी गई सेवा, मसलन कंपनी को किराये पर दी गई संपत्ति, को आरसीएम के तहत कर दायरे में आने पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की जा रही थी। उसने कहा कि सिर्फ निदेशक की आधिकारिक हैसियत से दी गई सेवाएं ही आरसीएम के दायरे में आएंगी।
एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के वरिष्ठ साझेदार रजत मोहन ने कहा कि वित्त मंत्रालय ने इस परिपत्र में निदेशक की निजी हैसियत और उसके द्वारा दी जाने वाली निजी सेवाओं के बारे में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की है।
मोहन ने कहा कि जब तक कि सीबीआईसी (केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड) 'निदेशक सेवाओं' के वर्गीकरण के लिए स्पष्ट नियम नहीं देता है, बैंक गारंटी, सलाहकार सेवाओं, प्रशिक्षण सेवाओं और योजना सेवाओं जैसी अन्य निदेशक सेवाओं पर कराधान उद्योग के लिए एक अस्पष्ट क्षेत्र बना रहेगा।
प्रेम
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