देश की खबरें | सरकार ने नियमों में बदलाव के बाद कोयला नीलामी की: कांग्रेस

नयी दिल्ली, 24 फरवरी कांग्रेस ने शनिवार को कैग रिपोर्ट का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए नियमों में बदलाव कर कोयला नीलामी की और इससे राजस्व का भारी नुकसान हुआ।

विपक्षी दल ने यह भी पूछा कि कोयला नीलामी पर चिंता जताने वाले दो भाजपा नेताओं के पत्रों पर सरकार और प्रधानमंत्री ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की। इसने पूछा कि क्या सरकार इस मामले में ईडी जांच का आदेश देगी।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने एक संवाददाता सम्मेलन में भाजपा नेता और अब मंत्री आर के सिंह तथा राजीव चंद्रशेखर के पत्र दिखाए तथा कहा कि इनमें 2015 में कुछ कंपनियों को कोयला नीलामी में केवल दो संबंधित कंपनियों को ब्लॉक के लिए बोली लगाने की अनुमति देने पर चिंता जताई गई थी जिससे राजस्व की हानि हुई।

उन्होंने आरोप लगाया कि बाद में दोनों को मंत्री बना दिया गया और उसके बाद उनकी चिंताओं पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।

खेड़ा ने पूछा, "क्या मोदी सरकार ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) छापेमारी का आदेश देगी और मिलीभगत एवं भ्रष्टाचार की इस घटना की जांच करेगी।"

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, " 'मोदी की गारंटी' के बारे में बात करते हुए प्रधानमंत्री शहर गए हैं। उन्होंने अपने कॉर्पोरेट चंदा देने वालों को एकमात्र जो गारंटी दी है, वह 'चंदा दो, कोयला लो' है।"

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार का 'श्वेतपत्र' 2014 में कथित 'कोलगेट' घोटाले की चर्चा से शुरू हुआ।

रमेश ने आरोप लगाया, "हालांकि असली घोटाला पिछले 10 वर्षों के 'अन्याय काल' में हुआ, जब मोदी सरकार ने अपने ही नेताओं की चेतावनियों के बावजूद उपयोग के लिए तैयार, अत्यधिक लाभदायक कोयला खदानों को अपने ‘परम मित्र’ एवं ‘चंदा दाता’ को कौड़ियों के भाव में सौंप दिया। कोयला नीलामी में पूरी तरह से धांधली हुई है।"

उन्होंने आरोप लगाया, "मोदी सरकार ने 'सीमित निविदा' के साथ नीलामी में धांधली की, ताकि नीलाम किए गए प्रत्येक कोयला ब्लॉक के लिए, केवल एक प्रकार के कोयले के उपयोग की अनुमति दी जाए। इससे प्रत्येक कोयला ब्लॉक के लिए प्रतिस्पर्धा करने वाली कंपनियों की संख्या सीमित हो गई, जिससे कीमतें बहुत कम हो गईं। इससे सरकारी खजाने को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।''

कांग्रेस नेता ने कहा, "2014 में, एक भाजपा सांसद, जो अब केंद्रीय ऊर्जा मंत्री हैं, ने तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली को लिखा था कि इस तरह की 'सीमित निविदा' से 'कार्टेल गठन और जानबूझकर कम मूल्यांकन' हो सकता है, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हो सकता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक अन्य सांसद, जो अब इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी राज्य मंत्री हैं, ने 2015 में इसी मुद्दे को उठाने के लिए तत्कालीन कोयला मंत्री को पत्र लिखा था। चेतावनियों के अनुरूप, कोयला मंत्री और कैग ने खुद स्वीकार किया कि कम से कम 15 कोयला ब्लॉक में कार्टेल गठन हुआ, जिससे सरकारी खजाने का नुकसान हुआ।’’

खेड़ा ने पूछा कि जब भाजपा नेता "भ्रष्टाचार, धांधली और कार्टेल" के बारे में पत्र लिख रहे थे तो प्रधानमंत्री ने उन्हें नजरअंदाज क्यों किया।

उनके अनुसार, मोदी सरकार 2015 में 41 अरब टन से अधिक कोयले के साथ 200 से अधिक ब्लॉक वितरित करने के लिए एक नयी कोयला नीलामी और आवंटन नीति लेकर आई थी। इसके बाद, पार्टी के भीतर से इस नीति के खिलाफ आंतरिक असहमति दिखी। खुद दो भाजपा नेताओं की ओर से असहमति की चेतावनी आई।

उन्होंने दावा किया, ''हालांकि, 2016 में कैग ने संसद में एक रिपोर्ट पेश की थी जिसमें सबूत दिया गया था कि कोयला नीलामी कितनी संदिग्ध रही थी।''

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