‘अटकी आवास परियोजनाओं के लिए 25000 करोड़ रुपये के कोष कर्ज आसान  करे सरकार’
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नयी दिल्ली, 25 अप्रैल मध्य प्रदेश-रेरा के चेयरमैन एंथनी डि सा ने शनिवार को कहा कि सरकार को रुकी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए बनाए गए 25,000 करोड़ रुपये के विशेष कोष से डेवलपरों को जल्द पैसा जारी करने की व्यवस्था करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस कोष से धन मिलने में आने वाली अड़चने दूर करके ही इस योजना को सफल बनया जा सकता है।

डि सा नारेडको की एक संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। वेब कांफ्रेंसिंग के जरिए नारेडको के 1,000 से अधिक सदस्यों को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही। रेरा (रियल एस्टेट (विनियम एवं विकास) अधिनियम) के तहत राज्यों में रियल एस्टेट नियामक का गठन किया गया है।

संगोष्ठी में नियामकों ने क्षेत्र को संकट से उबारने के लिए थोड़ी राहत देने की जरूरत बतायी। उन्होंने कहा कि वह कई मांगों पर विचार कर रहे हैं जिसमें परियोजनाओं को पूरा किए जाने की समयसीमा बढ़ाने का विकल्प भी शामिल है।

उत्तर प्रदेश रेरा के चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा कि सरकार जब अनुमति दे दे, निर्माण गतिविधियों को शुरू किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन के दौरान मांग में कमी आने की उम्मीद है। वहीं वित्त पोषण का भी मुद्दा है ही।

कुमार ने निर्माणु शुरू होने के बाद श्रमिकों को सामुदायिक दूरी का पूरा प्रशिक्षण देने और उचित सुरक्षा उपायों के साथ निर्माण शुरू करने की जरूरत पर भी बल दिया।

एंथनी डी सा ने कहा कि लॉकडाउन के चलते डेवलपरों को नकदी संकट और मांग में कमी का सामना करना पड़ रहा है।

पिछले साल नवंबर में सरकार ने 1,500 रुकी पड़ी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के लिए 25,000 करोड़ रुपये का विशेष कोष बनाने की घोषणा की थी।

इस बारे में एंथनी ने कहा कि हालांकि इस योजना को लागू करने कुछ दिक्कतें हैं। लेकिन इससे 4.58 लाख मकानों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इस कोष का प्रबंधन एसबीआई कैपिटल के पास है और मौजूदा बैंक या ऋणदाता फर्स्ट चार्ज के निर्माण के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र नहीं दे रहे।

उन्होंने कहा कि डेवलपरों की इस कोष तक पहंच नहीं है। ऐसे में सरकार को इसकी बाधाएं दूर करनी चाहिए।

रीयल एस्टेट विकास कंपनियों के मंच नारेडको के अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि इस समय इस क्षेत्र के लिए समय कठिन चल रहा है। इस समय कंपनियों पर जो वित्तीय संकट है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने ऐसे में सरकारों से राहत की मांग की।

हरियाणा रेरा के चेयरमैन केके खंडेलवाल ने कहा कि रीयल एस्टेट परियोजनाओं की मंजारी की एकल खिड़की व्यवस्था होनी चाहिए।

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