नयी दिल्ली, चार अगस्त उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने उच्चतम न्यायालय सहित विभिन्न अदालतों में लंबित मामले की बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए मंगलवार को सरकार एवं न्यायपालिका से अपील की कि विलंब के मुद्दों पर ध्यान देकर शीघ्र न्याय दिलाया जाना सुनिश्चित किया जाए ।
नायडू ने न्याय निष्पादन में तेजी लाने और इसे वहन योग्य बनाने की जरूरत को रेखांकित किया ।
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एक आधिकारिक बयान के अनुसार, मामलों की सुनवाई स्थगित होने का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इससे न्याय महंगा हो गया है ।
उपराष्ट्रपति वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से आंध्र प्रदेश के डा. वी आर आंबेडकर विधि कालेज के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित कर रहे थे ।
उन्होंने कहा कि पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (जनहित याचिका) को व्यक्तिगत, राजनीतिक और आर्थिक कारणों से प्राइवेट इंटरेस्ट लिटिगेशन (निजी हित याचिका) नहीं बनना चाहिए । अगर यह (जनहित याचिका) व्यापक लोक हित में है, तो कई बुराई नहीं है।
नायडू ने विधि छात्रों से ऐसे लोगों की आवाज बनने को कहा जो अपनी आवाज नहीं पहुंचा पाते । उन्होंने विधि छात्रों से अपने कानूनी ज्ञान का उपयोग कमजोर वर्ग के लोगों के लिये करने और उनकी कानूनी मदद करने के लिये कहा ।
उपराष्ट्रपति ने विधि छात्रों से पेशेवर तौर तरीका एवं नैतिक आचरण विकसित करने को कहा । उन्होंने भयमुक्त एवं निष्पक्ष तरीके से अपने कर्तव्य का पालन करने को कहा ।
नायडु ने कहा कि कानून को सामान्य होना चाहिए और उलझा हुआ नहीं होना चाहिए। इसका ध्यान केवल शब्दों पर नहीं बल्कि इसकी भावना पर होनी चाहिए ।
उन्होंने कहा, ‘‘कानून का मकसद और उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए।’’
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