नयी दिल्ली, 17 मार्च संसद की एक स्थायी समिति ने कहा है कि शिक्षा के लिए दी जाने वाली वार्षिक छात्रवृत्ति वर्तमान समय के खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है और ऐसे में महंगाई के मद्देनजर समय-समय पर इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।
वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की मांगों पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट में सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग से शिक्षा मंत्रालय और अन्य हितधारकों के सहयोग से छात्रवृत्ति राशि की समीक्षा करने का आग्रह किया है।
समिति की रिपोर्ट सोमवार को संसद में पेश की गई।
समिति ने सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग से विभाग की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं के तय उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए शिक्षा मंत्रालय और अन्य हितधारकों के साथ विभिन्न पाठ्यक्रमों में पढ़ने वाले प्रत्येक छात्र को दी जाने वाली वार्षिक छात्रवृत्ति राशि की समीक्षा करने को कहा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति की राय है कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए किसी छात्र को दी जाने वाली वार्षिक छात्रवृत्ति उचित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए आवश्यक वर्तमान खर्च को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इसमें कहा गया है कि समिति यह सिफारिश करना चाहेगी कि महंगाई को देखते हुए प्रत्येक योजना के तहत एक छात्र को दी जाने वाली छात्रवृत्ति की राशि की समय-समय पर समीक्षा की जानी चाहिए ताकि योजना अधिक उपयोगी हो।
समिति ने कई कल्याणकारी कार्यक्रमों में अनुमानित आवश्यकताओं और वास्तविक आवंटन के बीच विसंगतियों का उल्लेख भी किया है।
उसका कहना है कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 14,164.42 करोड़ रुपये के बजटीय आवंटन के बावजूद, कई योजनाएं अल्प वित्त पोषित हैं, जिससे उनकी पहुंच और प्रभाव सीमित हो गया है।
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