नयी दिल्ली, 10 मई सरकार ने मलेशिया, थाइलैंड और वियतनाम से आयातित तांबे की ट्यूब और पाइप पर पांच साल के लिए प्रतिपूर्ति शुल्क लगाया है।
व्यापार उपचार महानिदेशालय (डीजीटीआर) ने मामले को खुद संज्ञान में लेकर जांच की और उसकी सिफारिशों के आधार पर यह कार्रवाई हुई।
शुल्क लगाने का मकसद घरेलू कंपनियों को इन देशों के सस्ते आयात से संरक्षण देना है।
राजस्व विभाग ने 28 अप्रैल को कहा, ‘‘इस अधिसूचना के तहत लगाया गया प्रतिपूर्ति शुल्क आधिकारिक राजपत्र में इसके प्रकाशन की तारीख से पांच साल के लिए है, जो भारतीय मुद्रा में देय होगा।’’
लगाया गया शुल्क सीआईएफ (लागत, बीमा, माल ढुलाई) मूल्य के 2.13 प्रतिशत से 14.76 प्रतिशत के बीच है। सीआईएफ मूल्य माल का वास्तविक मूल्य है, जिस पर उनका निर्यात किया जाता है।
डीजीटीआर द्वारा शुल्क लगाने की सिफारिश के बाद वित्त मंत्रालय इस संबंध में अंतिम निर्णय लेता है।
प्रतिपूर्ति शुल्क घरेलू व्यापार एवं बाजार की रक्षा के लिए आयातित वस्तुओं पर लगाया जाता है।
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