सरकार अखिल भारतीय न्यायिक सेवा स्थापित करने के लिए मसौदा विधेयक को दे रही अंतिम रूप
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नयी दिल्ली, 26 मई सरकार प्रवेश परीक्षा के जरिए अधीनस्थ अदालतों में अधिकारियों की भर्ती के लिए अखिल भारतीय न्यायिक सेवा गठित करने से जुड़े एक विधेयक को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में है।

अखिल भारतीय परीक्षा में सफल होने वालों को उच्च न्यायालय और राज्य सरकारों द्वारा नियुक्त किया जाएगा।

सरकार के सूत्रों ने बताया कि मसौदा केंद्रीय मंत्रिमंडल में भेजने से पहले प्रस्तावित अखिल भारतीय सेवा की विभिन्न विशेषताओं को उच्च न्यायपालिका के साथ साझा किया जाएगा।

भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय पुलिस सेवा की तर्ज पर अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के प्रावधान पर आजादी के तुरंत बाद विचार किया गया था।

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा का प्रावधान 1976 में संविधान के अनुच्छेद 312 में 42 वें संशोधन के माध्यम से शामिल किया गया था। लेकिन इसके व्यापक पहलुओं पर निर्णय लेने के लिए एक विधेयक की आवश्यकता होगी।

अभी, विभिन्न उच्च न्यायालय और राज्य सेवा आयोग न्यायिक अधिकारियों की भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करते हैं।

25 उच्च न्यायालयों में से अधिकतर के निचली न्यायपालिका पर प्रशासनिक नियंत्रण बनाए रखना चाहते हैं। प्रस्तावित कानून उन्हें अधीनस्थ अदालतों के न्यायाधीशों को नियुक्त करने की अनुमति दे सकता है।

निचली अदालतों में मामलों में दलीलें स्थानीय ओं में दी जाती हैं। इसलिए ऐसी आशंकाएं हैं कि उत्तर भारत का कोई व्यक्ति दक्षिणी राज्य में कैसे सुनवाई कर सकता है।

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