नयी दिल्ली, 28 सितंबर केंद्र सरकार ने सोमवार को एनएससीएन-के पर प्रतिबंध बढ़ाते हुए कहा कि नगा उग्रवादी संगठन हिंसा, जबरन वसूली और अलगाववादी गतिविधियों में शामिल रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने एक अधिसूचना में कहा कि उग्रवादी संगठन 28 सितंबर, 2015 से 104 हिंसक घटनाओं में लिप्त रहा है जिनमें सात सुरक्षा कर्मी मारे गये, छह असैन्य नागरिक मारे गये और 75 नागरिकों का अपहरण किया गया।
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गृह मंत्रालय ने कहा कि एनएससीएन-के गैरकानूनी और हिंसक गतिविधियों में लिप्त रहा है और वह भारत सरकार और नगालैंड, मणिपुर तथा अरुणाचल प्रदेश की सरकारों की शक्तियों की अनदेखी कर रहा है और लोगों में आतंक तथा दहशत फैला रहा है।
यह समूह उल्फा, मणिपुर के मीतेई संगठनों जैसे अन्य गैरकानूनी संगठनों के साथ तालमेल बढ़ा रहा है तथा कारोबारियों, सरकारी अधिकारियों एवं अन्य नागरिकों के फिरौती के लिए अपहरण तथा जबरन वसूली में लिप्त है।
गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्येंद्र गर्ग द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया, ‘‘इसलिए गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) कानून, 1967 की धारा तीन की उप-धारा (आई) के तहत प्रदत्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए केंद्र सरकार नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (खापलांग) और उसके सभी गुटों, सहयोगी संगठनों को गैरकानूनी संगठन घोषित करती है।’’
गृह मंत्रालय ने कहा कि एनएससीएन-के का आत्मघोषित लक्ष्य नगालैंड तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के अन्य सशस्त्र अलगाववादी संगठनों के साथ मिलकर भारतीय संघ से अलग होकर भारत-म्यामां क्षेत्र के नगा बहुल इलाकों को शामिल करके एक संप्रभु नगालैंड बनाने का है।
उसने कहा कि उग्रवादी संगठन आतंकी गतिविधियों को जारी रखने, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर शिविर तथा गुप्त ठिकाने स्थापित करते रहने के लिए कैडर की भर्ती का अभियान चला रहा है।
उसे हथियार प्राप्ति और अन्य चीजों में दूसरे देशों में सक्रिय भारत-विरोधी ताकतों से मदद मिल रही है।
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