देश की खबरें | सरकार ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के सरंक्षण को लेकर प्रतिबद्ध : भूपेंद्र यादव

अहमदाबाद, 25 जून केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को कहा कि अस्तित्व के संकट का सामना कर रहे ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ को संरक्षित करने को लेकर भारत प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में स्थापित दो प्रजन्न केंद्रों से इनकी आबादी में वृद्धि होने की उम्मीद है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने यह टिप्पणी उन खबरों पर की कि गुजरात में ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ प्रजाति के केवल चार मादा पक्षी ही बचे हैं। उन्होंने कहा कि वह इस प्रजाति के पक्षियों के संरक्षण को लेकर आश्वस्त हैं और राजस्थान में स्थापित दो प्रजन्न केंद्र अच्छा काम कर रहे हैं।

यादव ने कहा,‘‘मैं ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के संरक्षण कार्यक्रम को लेकर आश्वस्त हूं। सरंक्षण के लिए हमें उन्हें इन्क्यूबेटर से निकलने के बाद वन परिस्थितियों में छोड़ना होगा। इन सभी विषयों पर हम गौर कर रहे हैं। मैं दोहरा रहा हूं कि विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ की संख्या में गिरावट मुख्य रूप से शिकार और उनकी खास खुराक की वजह से आ रही है।

यादव , प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार गत नौ साल में कैसे विकास और पर्यावरण संरक्षण के साथ ‘हरित विकास’ को प्रोत्साहित कर रही है, इस विषय पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

ग्रेड इंडियन बस्टर्ड की आबादी में गिरावट के कारणों में एक ‘ओवरहेड केबल’ होने के सवाल पर मंत्री ने कहा कि केवल चार पक्षियों की मौत इससे हुई है।

मंत्री ने कहा, ‘‘मेरा मानना है कि प्रजन्न कार्यक्रम से हम इनकी आबादी बढ़ाने में सफल होंगे...मैं भरोसे से कह सकता हूं कि हम इनके संरक्षण और रक्षण को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’’

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक ‘ग्रेड इंडियन बस्टर्ड’ राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और आंध्र प्रदेश में पाए जाते हैं लेकिन राजस्थान को छोड़ बाकी राज्यों में उनकी संख्या गिरकर चार या पांच रह गई है।

संकटग्रस्त इस जीव के संरक्षण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाने की वजह से राजस्थान में इस पक्षी की संख्या गत 20 साल में 250 से घटकर 50 से 60 रह गई है।

यादव ने कहा कि उनके मंत्रालय ने नदियों के किनारे पौधारोपण, मानव बस्तियों में अवजल शोधन संयंत्र स्थापित कर, नदी के उद्गम स्थल का संरक्षण करने जैसे कदमों के जरिये 13 नदियों को संरक्षित करने की योजना शुरू की है।

उन्होंने कहा कि भारत, भूमि क्षरण को रोकने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए उसने 2.6 करोड़ हेक्टयर भूमि का लक्ष्य रखा है।

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